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विशेष रिपोर्ट: जमशेदपुर वन प्रमंडल में ‘पार्क’ के नाम पर करोड़ों का खेल, हाथी कॉरिडोर बनवाना भूला विभाग

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​जमशेदपुर/चाकुलिया | अबुआ खबर डेस्क : जमशेदपुर वन प्रमंडल के चाकुलिया , मुसाबानी और मानगो वन क्षेत्र में इन दिनों विकास के नाम पर एक ऐसी इबारत लिखी जा रही है, जो धरातल पर कम और फाइलों में ज्यादा चमक रही है। जहाँ एक तरफ क्षेत्र में हाथियों का आतंक चरम पर है, वहीं दूसरी ओर विभाग ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ जैसी जीवन रक्षक योजनाओं को ठंडे बस्ते में डालकर करोड़ों की लागत से उद्यानों (पार्कों) के निर्माण में जुटा है।

कोल्हान के कई विधायकों ने सदन में कई बार जिस एलिफेंट कॉरिडोर के निर्माण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था, वह अब पूरी तरह ‘सफेद हाथी’ साबित हो रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के हमले में जान-माल का नुकसान लगातार हो रहा है, जिससे प्रति वर्ष हाथी के हमले से मरने वालों की संख्या बढ़ रही है,
लेकिन विभाग की प्राथमिकता कॉरिडोर नहीं, बल्कि पार्कों का निर्माण एवं सौंदर्यीकरण है।

सूत्रों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूरे वन प्रमंडल में लगभग पाँच सौ करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं पर काम चल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी राशि के कार्यों के लिए कोई आधिकारिक निविदा नहीं निकाली गई। पारिवारिक एकाधिकार: एक अधिकारी पूरे वन विभाग पर भारी, मंत्रालय में भी चलती है इनकी धमक ।
आरोप है कि निर्माण कार्य का जिम्मा एक ही अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों के इर्द-गिर्द सिमटा हुआ है।
​निर्माण कार्य: पार्क के साथ-साथ जगह-जगह पर आलीशान विश्रामगारों का निर्माण कराया जा रहा है।

इस पूरे प्रकरण के केंद्र में चाकुलिया के प्रभारी रेंज अधिकारी हैं। विभाग में उनकी पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उक्त अधिकारी वर्ष 2024 में ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उन्हें ‘विशेष कारणों’ का हवाला देकर तीन वर्षों का सेवा विस्तार दिया गया है।

जमशेदपुर वन प्रमंडल सहित पूरे कोल्हान की जनता पूछ रही है कि जब ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली हाथियों का खतरा बना हुआ है, तो सौ करोड़ से अधिक की लागत वाले ये पार्क किसके लिए बनाए जा रहे हैं? क्या यह जनता की सुविधा के लिए है या केवल

जब योजनाएं बिना पारदर्शिता के किसी एक चहेते अधिकारी को सौंपी जाती हैं, तो वह विकास नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का नया मॉडल होता है।

कैसे जमशेदपुर का वन विभाग बना भ्रष्टाचार का अड्डा

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