अबुआ खबर डेस्क जमशेदपुर :
धान अधिप्राप्ति व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
राज्य में किसानों को उनकी कृषि उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए बनाई गई सरकारी धान अधिप्राप्ति व्यवस्था आज खुद सवालों के घेरे में है। लेम्पस (धान अधिप्राप्ति केंद्र) के माध्यम से की जाने वाली खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे किसानों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
किसानों को नहीं मिल रहा पूरा लाभ
किसानों का आरोप है कि धान बेचने के बावजूद उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है, वहीं कई मामलों में निर्धारित समर्थन मूल्य से कम दर पर धान लेने का दबाव बनाया जा रहा है। जैसे मोइसचर के नाम पर 15 से 20% प्रतिशत वजन में कटोती कर किसानों से खरीद की जा रही है, इससे मेहनतकश किसान आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं।
कर्मियों और बिचौलियों पर मिलीभगत के आरोप
धान अधिप्राप्ति केंद्रों में कार्यरत कुछ कर्मियों और बिचौलियों (दलालों) की मिलीभगत से अवैध कमाई किए जाने के आरोप भी लग रहे हैं। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर खास लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है, जबकि वास्तविक किसान दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
पारदर्शिता के अभाव में बढ़ रही समस्याएं
खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कारण अव्यवस्थाएं बढ़ती जा रही हैं। किसानों का कहना है कि तौल, गुणवत्ता जांच और भुगतान प्रक्रिया में गड़बड़ियां आम हो चुकी हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
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विगत कुछ दिनों पहले गुदाबंदा प्रखण्ड के बन माकदी लेम्पस मे लेम्पस के लेखापाल कर्मी और विभागीय कर्मियों की मिली भगत से की जा रही थी जिसका जिला आपूर्ति पदाधिकारी के जाँच के दौरान कई अनियमित्तता पाई गई जिस पर अभी तक कोई ठोस कार्यवाई नहीं हो सकी।

ऐसा लगभग हर लेम्पस मे लोगों की प्रसाशन से माँग है की सभी लेम्पस के खाता वही सहित स्टॉक और मिलर को दिए गए धान की भी जाँच अविलंब किया जाना चाहिए।
सरकार और प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
किसानों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से पूरे धान अधिप्राप्ति तंत्र की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी कर्मियों व दलालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, तब तक किसानों को उनका हक मिलना मुश्किल है।
किसानों के हित में सुधार जरूरी
लोगों का मानना है कि किसानों के हित में धान खरीद प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और किसान–हितैषी बनाने की आवश्यकता है, ताकि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ सीधे किसानों तक पहुंच सके।