बहरागोड़ा, 14 जून 2024:
बहरागोड़ा प्रखण्ड के पाथरी, गुहियापाल, केशरदा, मौदा, खांडामौदा, साकार, बनकाटा और माटिहाना पंचायतों में ओड़िया समाज के लोगों ने पारंपरिक उल्लास और भव्यता के साथ रजो संक्रांति पर्व की शुरुआत की। यह पर्व 14 जून से प्रारंभ होकर 17 जून 2024 तक मनाया जाएगा।
रजो संक्रांति ओड़िया संस्कृति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो न केवल बेटियों के प्रति सम्मान दर्शाता है, बल्कि धरती माता और कृषक जीवन शैली के प्रति गहरी आस्था को भी प्रकट करता है। यह पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है:
पहला दिन ‘राजा’ कहलाता है,
दूसरा दिन ‘मिथुना संक्रांति’,
तीसरा दिन ‘भू-दाहा’ या ‘बासी राजा’,
और चौथा दिन ‘वसुमती स्नान’ के रूप में जाना जाता है।
इस विशेष पर्व में महिलाएं और लड़कियां प्रमुख भूमिका निभाती हैं। उन्हें इस दौरान विश्राम दिया जाता है और दूध, हल्दी तथा चंदन से स्नान कराया जाता है। फिर वे नए वस्त्र धारण कर झूलों पर झूलती हैं, जिन्हें रंग-बिरंगे फूलों से सजाया जाता है। यह पर्व उनकी इच्छाओं और अभिव्यक्तियों का उत्सव बन जाता है।
झारखंड के कई हिस्सों में रहने वाले ओड़िया भाषी समुदाय के साथ-साथ स्थानीय आदिवासी समाज भी इस पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाता है। रजो संक्रांति में हर व्यक्ति पान खाता है, और मिठास से भरपूर पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं। ग्रामीण अंचलों में पर्व का खासा उत्साह देखा जा रहा है।