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झारखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले सियासी हलचल तेज, सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने बनाई रणनीति

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रांची: झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र की उलटी गिनती शुरू होते ही राजधानी में राजनीतिक गतिविधि तेजी से बढ़ गई है। सत्र के दौरान सदन में होने वाली बहस, विपक्ष की रणनीति और सरकार की तैयारियों को लेकर सभी दल सक्रिय हो गए हैं। इसी क्रम में सत्तारूढ़ गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार दोपहर 2 बजे एटीआई (प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान) में आयोजित की गई है, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे।

इस बैठक में झामुमो, कांग्रेस, राजद और वाम दलों के विधायकों को शामिल होने के लिए कहा गया है। बैठक का उद्देश्य आने वाले सत्र में विपक्ष के सवालों का समन्वित रूप से सामना करना और सरकार की उपलब्धियों को मजबूती से सदन में रखना है।

झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने बताया कि बैठक में मुख्य रूप से तीन मुद्दों पर चर्चा होगी—

  1. विपक्ष की संभावित रणनीति का अध्ययन
  2. सदन में सरकार की ओर से मजबूत जवाब की तैयारी
  3. जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना

उन्होंने कहा कि सरकार सत्र में जनता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठाएगी और विपक्ष के किसी भी आक्रामक रुख का सामूहिक रूप से मुकाबला किया जाएगा।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है।
भाजपा विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक 7 दिसंबर को शाम 7 बजे प्रदेश भाजपा कार्यालय में बुलाई गई है।

इस बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी करेंगे। सूत्रों के अनुसार, भाजपा का फोकस रहेगा—

  • सरकार को घेरने के लिए मुद्दों की पहचान,
  • जनहित आधारित प्रश्नों को आक्रामक तरीके से उठाना,
  • और पूरे सत्र में विपक्षी एकजुटता बनाए रखना।

भाजपा की रणनीति है कि सत्र के दौरान सरकार की कमजोरियों, योजनाओं में अव्यवस्था और प्रशासनिक मुद्दों को सदन में खुलकर उठाया जाए।

राज्य के योजना एवं विकास विभाग में बुधवार को अनुपूरक बजट को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में विभिन्न विभागों की तैयारियों का जायज़ा लिया गया।

सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले अनुपूरक बजट संबंधी सभी प्रस्तावों को समय पर तैयार करें और किसी भी तरह की त्रुटि न रहने दें।

शीतकालीन सत्र 5 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है, और सरकार चाहती है कि बजट से जुड़े सभी दस्तावेज पहले से तैयार रहें, ताकि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित हो सके।

शीतकालीन सत्र से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की लगातार बैठकों ने यह संकेत साफ कर दिया है कि इस बार सदन में बहस तेज होने वाली है।

एक ओर जहाँ सरकार अपने कामकाज को मजबूती से पेश करने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष भी पूरे दमखम के साथ सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।

इससे यह लगभग तय है कि शीतकालीन सत्र राजनीतिक गर्मागर्मी, तीखी नोकझोंक, और अहम मुद्दों पर गहन बहस का साक्षी बनेगा।