पटना। अबुआ खबर डेस्क
बिहार के नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे के जरिए परिसीमन (डिलीमिटेशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है।
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तेजस्वी यादव का कहना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा नया नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से समाजवादी नेताओं, खासकर Lalu Prasad Yadav की प्रमुख मांग रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में अधिक अवसर मिलना चाहिए, लेकिन इसके साथ सामाजिक न्याय का संतुलन भी जरूरी है।
आरक्षण के भीतर आरक्षण की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया कि वे केवल 33% नहीं, बल्कि 50% महिला आरक्षण के पक्षधर हैं। साथ ही उन्होंने यह भी मांग रखी कि इस आरक्षण के भीतर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए अलग से हिस्सेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनके अनुसार, ऐसा करने से ही यह व्यवस्था वास्तव में न्यायसंगत मानी जाएगी।
परिसीमन और जनगणना पर उठे सवाल
तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण कानून को पारित किए जाने के बावजूद इसके क्रियान्वयन को जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया गया है, जिससे इसकी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अभी तक इसे पूरी तरह लागू करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
उनका कहना है कि इस तरह की रणनीति से लोकतांत्रिक ढांचे और संघीय व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है।