पटना | अबुआ खबर डेस्क
मोकामा की राजनीति एक बार फिर खून से लाल हो गई है। राजद (RJD) नेता और बाहुबली दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में पुलिस ने शनिवार को चर्चित बाहुबली नेता छोटे सरकार उर्फ अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि 150 से अधिक पुलिसकर्मियों की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर उन्हें हिरासत में लिया और पटना ले जाया गया है।
यह गिरफ्तारी उस विवादित बयान के ठीक 48 घंटे बाद हुई है, जिसने मोकामा की राजनीति में भूचाल ला दिया था — और शायद यही बयान दुलारचंद की मौत की वजह भी बना।
🔹 विवादित बयान बना जानलेवा
28 अक्टूबर को दुलारचंद यादव ने एक जनसभा में जेडीयू उम्मीदवार नीलम देवी (अनंत सिंह की पत्नी) पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, “वो नीलम देवी नहीं, नीलम खातून हैं… चुनाव के वक्त दरी लेकर घूम रही थीं, नाचने वाली आई है… अनंत सिंह ने उसे रख लिया, शादी हुई भी थी क्या?”
इस बयान के बाद मोकामा की सियासत में उबाल आ गया था।
🔹 दो दिन बाद चली गोलियां, सड़कों पर अफरा-तफरी
30 अक्टूबर की दोपहर करीब तीन बजे, तारतर गांव के पास उस वक्त तनाव फैल गया जब दुलारचंद यादव जनसुराज उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के प्रचार में पहुंचे। उसी समय अनंत सिंह का काफिला भी वहां से गुजर रहा था।
दोनों पक्षों के समर्थकों में कहासुनी हुई, और देखते ही देखते गोलियां चलने लगीं। मौके पर भगदड़ मच गई। पुलिस जब पहुंची तो कई वाहनों के शीशे टूटे मिले और ट्रॉली में पड़ा शव दुलारचंद यादव का था।
🔹 पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पलट दी कहानी
पहले यह माना जा रहा था कि दुलारचंद की मौत गोली लगने से हुई, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने चौंका दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके सीने की हड्डियाँ टूटी थीं, फेफड़े फटे पाए गए — यानी मौत गोली से नहीं, वाहन से कुचलने के कारण हुई।
बाढ़ अनुमंडल अस्पताल में तीन डॉक्टरों की टीम ने दो घंटे तक पोस्टमॉर्टम किया, जिसके बाद यह साफ हो गया कि यह कोई सामान्य झड़प नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या थी।
🔹 परिजनों ने अनंत सिंह पर लगाया गंभीर आरोप
दुलारचंद के पोते नीरज कुमार ने एफआईआर में लिखा है — “अनंत सिंह ने दादा को गाली दी, गोली मारी और गाड़ी चढ़ा दी। वो माहौल शांत कराने गए थे, लेकिन उन्हें बेरहमी से मार दिया गया।”
वहीं, पुलिस ने अब तक 35 लोगों को हिरासत में लिया है और कई स्थानों पर छापेमारी जारी है।
🔹 अनंत सिंह बोले — “हमें फंसाया जा रहा है”
गिरफ्तारी से पहले अनंत सिंह ने सभी आरोपों से इंकार करते हुए कहा, “हम टाल इलाके में वोट मांग रहे थे। पीछे की गाड़ियों पर हमला हुआ। यह सूरजभान सिंह की साजिश है, हमें जानबूझकर फंसाया जा रहा है।”
इस पर सूरजभान सिंह ने पलटवार करते हुए कहा, “यह घटना बिहार की छवि पर दाग है। चुनाव आयोग को रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच करानी चाहिए।”
🔹 मोकामा की राजनीति फिर पुराने दौर में
मोकामा की राजनीति हमेशा से बाहुबल और प्रभाव की कहानी रही है।
1990 और 1995 में दिलीप सिंह (अनंत सिंह के बड़े भाई) विधायक रहे, 2000 में सूरजभान सिंह, और 2005 से लगातार अनंत सिंह या उनके परिवार का दबदबा रहा।
2022 के उपचुनाव में अनंत सिंह के जेल जाने के बाद उनकी पत्नी नीलम देवी ने यह सीट संभाली थी।
अब उसी नीलम देवी को लेकर दिए गए बयान के बाद दुलारचंद यादव की हत्या ने एक बार फिर मोकामा को सुर्खियों में ला दिया है — और बिहार की सियासत को पुराने “जंगलराज” की याद दिला दी है।