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घाटशिला में 7 दिन बाद जनता सुनाएगी फैसला — किसकी होगी जीत

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घाटशिला | अबुआ खबर डेस्क

झारखंड की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। मौसम भले ही ठंडी हवाओं और हल्की धूप से सुहाना हो चला हो, लेकिन घाटशिला की सियासत में इस समय आखिरी युद्ध की शुरुआत हो चुकी है।
सिर्फ 7 दिन बाद, यानी 11 नवंबर को जनता यह तय करेगी कि इस सीट की गद्दी पर कौन बैठेगा — झामुमो की हेमंत-कल्पना की जोड़ी का उम्मीदवार या भाजपा का योद्धा बाबूलाल सोरेन।

🔹 झामुमो ने झोंकी पूरी ताकत, हेमंत-कल्पना की जोड़ी मैदान में

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने घाटशिला को इस उपचुनाव में अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी, पार्टी की केंद्रीय उपाध्यक्ष कल्पना सोरेन, दोनों ने प्रचार अभियान की कमान खुद संभाल ली है।
3 नवंबर से 8 नवंबर तक दोनों नेता विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों में जनसभाएं, रोड शो और संवाद कार्यक्रम कर जनता से सीधा जुड़ाव बनाएंगे

जहां हेमंत सोरेन विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं को जनता के सामने रख सकते हैं, वहीं कल्पना सोरेन महिलाओं के मुद्दों और स्थानीय सशक्तिकरण पर फोकस कर सकती हैं।
पार्टी का मुख्य एजेंडा है — स्थानीय रोजगार, बंद पड़े माइनिंग प्रोजेक्ट्स को पुनः शुरू करना, और मइया सम्मान योजना को लेकर जागरूकता फैलाना।

झामुमो के लिए यह सीट सिर्फ उपचुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक साख बचाने की लड़ाई बन चुकी है।

🔹 भाजपा ने भी कस ली कमर, स्टार प्रचारकों की फौज मैदान में

वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी घाटशिला में किसी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है।
भाजपा ने अपने शीर्ष नेताओं और स्टार प्रचारकों की पूरी फौज उतार दी है।
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा समेत झारखंड और पड़ोसी राज्यों के वरिष्ठ नेता लगातार प्रचार अभियान चला रहे हैं।

भाजपा इस चुनाव में बांग्लादेशी घुसपैठ, बेरोजगारी और राज्य में बढ़ते अपराध को प्रमुख चुनावी मुद्दे के रूप में जनता के बीच उठा रही है।
पार्टी के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन इस बार पिछली हार का बदला लेने के मूड में हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें झामुमो के रामदास सोरेन ने 22,000 से अधिक वोटों के अंतर से पराजित किया था।

🔹 जनता करेगी फैसला — किसके पक्ष में जाएगा जनादेश

घाटशिला उपचुनाव में अब दोनों दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है।
पार्टी कार्यकर्ता, नेता और समर्थक — सभी गांव-गांव जाकर जनता से संपर्क बना रहे हैं।
जहां झामुमो स्थानीय मुद्दों और जनभावना पर भरोसा जता रही है, वहीं भाजपा कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को मुख्य हथियार बना रही है।

11 नवंबर को मतदान होगा और 14 नवंबर को नतीजे साफ करेंगे कि घाटशिला की जनता ने किस पर भरोसा जताया —
सत्ता में बैठे हेमंत-कल्पना के उम्मीदवार पर या विपक्ष के योद्धा बाबूलाल सोरेन पर।