घाटशिला विधानसभा उपचुनाव अब अपने निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। मतदान 11 नवंबर को होना है और प्रचार 9 नवंबर की शाम तक समाप्त हो जाएगा। इस बार कुल 2,55,823 मतदाता तय करेंगे कि घाटशिला की सत्ता किसके हाथ जाएगी।
मुकाबला जितना बाहर से खुला दिखाई दे रहा है, अंदरूनी राजनीतिक समीकरण उतने ही रोचक और चुनौतीपूर्ण हैं।
झामुमो की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन की जोड़ी पूरे क्षेत्र में सक्रिय नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार पार्टी ने अपने संगठन को पूरी तरह एक्टिव मोड में रखा है। पार्टी ने अंतिम दो दिनों के लिए विशेष रणनीति तैयार की है, जिसमें हर पंचायत में मिनी जनसंवाद और महिला समूहों के जरिए मतदाताओं को जोड़ने की योजना शामिल है।
वहीं, भाजपा ने इस उपचुनाव को अपनी प्रतिष्ठा की लड़ाई बना लिया है। स्थानीय नेताओं को स्पष्ट निर्देश मिले हैं कि “घाटशिला जीतने के लिए बूथ स्तर पर पूरी ताकत लगानी होगी”। पार्टी ने घाटशिला के 42 कमजोर बूथों पर विशेष टीम तैनात की है, जिनकी मॉनिटरिंग सीधे प्रदेश नेतृत्व कर रहा है। हालांकि कुछ स्थानीय नेताओं में अंदरूनी मतभेद बने हुए हैं, जो चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।
इस बार झामुमो के लिए ओबीसी और महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन आज मऊभंडार और जादूगोड़ा में संयुक्त सभा को संबोधित करेंगे। भाजपा की ओर से बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा, रघुवर दास और आदित्य साहू कई छोटी सभाओं और नुक्कड़ बैठकों में जुटे हुए हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि घाटशिला की लड़ाई अब “नेतृत्व बनाम नेटवर्क” की जंग में बदल गई है। झामुमो भावनात्मक जुड़ाव और संगठन की मजबूती पर भरोसा कर रही है, जबकि भाजपा बूथ प्रबंधन और जमीनी ताकत पर दांव लगा रही है।
अब जनता का फैसला ही तय करेगा कि क्या हेमंत-कल्पना की जोड़ी घाटशिला में फिर से जीत दर्ज कर पाएगी, या भाजपा अपने पुराने किले पर भगवा लहराने में सफल होगी। परिणाम 14 नवंबर को साफ हो जाएगा।