पटना: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान भले ही अभी नहीं हुआ हो, लेकिन महागठबंधन (INDIA गठबंधन) में सीट बंटवारे को लेकर चर्चाओं और खींचतान ने जोर पकड़ लिया है। गठबंधन की कोशिश है कि 10 अक्टूबर तक सीटों पर सहमति बन जाए, लेकिन घटक दलों की बढ़ी मांगों ने माहौल को गर्मा दिया है।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस और राजद के बीच सबसे ज्यादा मतभेद सामने आए हैं। 2020 के चुनाव में कांग्रेस को मिले 70 सीटों में से 51 सीटें हारना पड़ी थीं। इस बार पार्टी उन 37 सीटों पर चुनाव लड़ने से साफ इंकार कर रही है, जहां पिछली बार हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस का कहना है कि कमजोर सीटों पर चुनाव लड़ने के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ा और इस बार वह केवल मजबूत और संभावित जीत वाली सीटों पर ही चुनाव मैदान में उतरना चाहती है।
अभी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस इस बार 76 सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी कर रही है, जबकि राजद अपनी 130 सीटों की तैयारी में है।
इसके अलावा, VIP (मुकेश सहनी) 60 सीटों की मांग कर रही है और भाकपा माले (CPI-ML) पिछले प्रदर्शन के आधार पर 40 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है। कुल मिलाकर बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं।
महागठबंधन में सीट बंटवारे में देरी का एक कारण यह भी है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बीमार चल रहे हैं, और राहुल गांधी विदेश यात्रा पर हैं। वहीं, राजद नेता तेजस्वी यादव जल्द से जल्द सीटों पर सहमति चाहते हैं।
इधर, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भी बिहार चुनाव में सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और महासचिव विनोद पांडेय 6 अक्टूबर को पटना में राजद नेताओं से मुलाकात करेंगे। झामुमो ने इस बार 12 सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है और दावा किया है कि इन क्षेत्रों में उनका संगठन मजबूत है।
वहीं एनडीए खेमे में स्थिति अलग है। सूत्रों के अनुसार, एनडीए के दलों में सीट बंटवारे पर सहमति बन चुकी है, और अब केवल उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। चुनाव तिथियों के ऐलान के तुरंत बाद एनडीए की पहली लिस्ट जारी होने की संभावना है।
पटना का वीरचंद पटेल मार्ग इन दिनों राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है, जहां JDU, RJD और BJP के मुख्यालय आमने-सामने हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, यहाँ का माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंग जाएगा।
बिहार हमेशा से लोकतंत्र का उत्सव मनाता आया है, और इस बार भी राज्य की जनता अपनी नई राजनीतिक दिशा तय करने के लिए तैयार है। बस अब इंतजार है चुनाव तिथियों और उम्मीदवारों की अंतिम लिस्ट का।