उत्तर प्रदेश।अबुआ खबर डेस्क
उत्तर प्रदेश के संतकबीर नगर जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग व्यक्ति को अपने जिंदा होने का सबूत देने के लिए अनोखा विरोध करना पड़ा। जिला कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक व्यक्ति कफन ओढ़कर जमीन पर लेटा मिला और उसके हाथ में एक तख्ती थी, जिस पर लिखा था “साहब, मैं जिंदा हूं।”
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इस व्यक्ति की पहचान इशहाक अली के रूप में हुई है, जो पहले सरकारी अस्पताल में कार्यरत थे और वर्ष 2019 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें कई साल पहले ही मृत घोषित कर दिया गया था, जिसके चलते उन्हें अपनी ही पहचान साबित करने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।
जिंदा इंसान को कागजों में मृत, जमीन पर कब्जे का आरोप
इशहाक अली का आरोप है कि राजस्व विभाग में हुई गड़बड़ी के कारण उन्हें वर्ष 2012 में ही दस्तावेजों में मृत दिखा दिया गया। इसके बाद उनकी करीब 0.770 हेक्टेयर पुश्तैनी जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज कर दी गई।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले में राजस्व कर्मियों की भूमिका संदिग्ध है। पीड़ित का कहना है कि गलत तरीके से कागजों में हेरफेर कर उनकी संपत्ति हड़प ली गई, जबकि वे पूरी तरह जीवित हैं।
7 साल से दफ्तरों के चक्कर, नहीं मिली राहत
इशहाक अली पिछले कई वर्षों से अपनी पहचान और जमीन वापस पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला। हर बार उन्हें नई प्रक्रिया और कागजी कार्रवाई में उलझा दिया जाता है।
थक-हारकर उन्होंने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया और खुद को “मृत” दर्शाते हुए कफन ओढ़कर डीएम कार्यालय के बाहर लेट गए, ताकि प्रशासन का ध्यान उनकी ओर आकर्षित हो सके।
सोशल मीडिया पर वायरल, सिस्टम पर उठे सवाल
इशहाक अली का यह अनोखा विरोध अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग जहां एक ओर उनके इस कदम को रचनात्मक विरोध बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा रहे हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर एक जिंदा व्यक्ति को अपनी पहचान साबित करने के लिए इस तरह का कदम क्यों उठाना पड़ रहा है।