Responsive Menu
Add more content here...

पूर्वी सिंहभूम में अवैध बालू माफिया का गढ़ बना गुड़ाबंदा, सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान

Spread the love

गुड़ाबंदा (पूर्वी सिंहभूम)।
झारखंड–ओडिशा सीमा से सटा गुड़ाबंदा प्रखंड अब अवैध बालू उत्खनन और कारोबार का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। क्षेत्र में कई ऐसे महत्वपूर्ण बालू घाट मौजूद हैं, जिनकी विधिवत लीज राज्य सरकार द्वारा नहीं दी गई है, इसके बावजूद इन घाटों से खुलेआम बालू का अवैध उठाव किया जा रहा है।

Advertisement

सूत्रों के अनुसार, गुड़ाबंदा प्रखंड से अवैध रूप से निकाला गया बालू मुख्य रूप से जमशेदपुर सहित पश्चिम बंगाल के बड़े शहरों में भेजा जा रहा है। हर दिन भारी संख्या में ट्रक और हाईवा वाहनों के माध्यम से बालू की ढुलाई की जा रही है, जिससे सरकार को मिलने वाला वैध राजस्व पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

इस पूरे अवैध बालू कारोबार के पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो पूरे नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा है। माफिया के इस सुनियोजित कारोबार के कारण राज्य सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है, जो अब तक करोड़ों रुपये तक पहुंच चुका है।

गुड़ाबंदा प्रखंड के स्वर्णरेखा नदी के पुलिया के समीप नूतनडीह क्षेत्र में अवैध बालू का बड़ा स्टॉक पॉइंट तैयार किया गया है। इसके अलावा अंगारपाड़ा के कदम चौक केनाल के पास, पुनासिया और स्वर्गछीड़ा क्षेत्रों में भी अवैध बालू के कई स्टॉक पॉइंट संचालित किए जा रहे हैं। इन स्थानों से रोजाना सैकड़ों वाहनों में बालू भरकर बाहर भेजा जा रहा है।

स्थानीय लोगों और सूत्रों का कहना है कि इतना बड़ा अवैध बालू कारोबार स्थानीय प्रशासन की कथित मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता होने और प्रभावी नियंत्रण के अभाव में बालू माफिया के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।

क्षेत्र में सक्रिय अवैध बालू माफिया पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में यह कारोबार और भी व्यापक रूप ले सकता है, जिससे सरकार को राजस्व नुकसान के साथ-साथ पर्यावरणीय क्षति भी झेलनी पड़ सकती है।