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गुड़ाबांदा की बेटियों का कमाल, जिला स्तर पर प्रथम स्थान

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गुड़ाबांदा। प्रखंड स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के बाद अब झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने जिला स्तर पर भी शानदार प्रदर्शन करते हुए सफलता का परचम लहराया है। शुक्रवार को आयोजित जिला स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी-2026 में विद्यालय की छात्राएं पूजा मुर्मू और सावित्री बास्के ने प्रथम स्थान प्राप्त कर न केवल अपने विद्यालय, बल्कि पूरे गुड़ाबांदा प्रखंड का नाम गौरवान्वित किया।

इस उपलब्धि के बाद विद्यालय परिसर में खुशी का माहौल देखने को मिला। विद्यालय की वार्डन गुरुबारी मार्डी ने दोनों छात्राओं का दीप प्रज्वलित कर भव्य स्वागत किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने छात्राओं को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ते रहने और नई ऊंचाइयों को छूने के लिए प्रेरित किया।

छात्राओं की इस सफलता के पीछे विज्ञान शिक्षक प्रणव मर्दिना का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके कुशल मार्गदर्शन में छात्राओं ने “स्मार्ट सेफ्टी हेलमेट” नामक एक अभिनव और उपयोगी मॉडल तैयार किया। इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को कम करना और लोगों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है।

इस हेलमेट की खासियत यह है कि जब तक चालक इसे नहीं पहनेगा, तब तक बाइक स्टार्ट नहीं होगी। इसके अलावा, यदि चालक ने शराब या किसी अन्य नशे का सेवन किया है, तो यह हेलमेट इंजन को स्टार्ट होने से रोक देगा। इस तरह यह मॉडल न केवल सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देता है, बल्कि नशामुक्त समाज के निर्माण का भी संदेश देता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के नवाचार भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। छात्राओं के इस मॉडल को प्रदर्शनी में काफी सराहना मिली और निर्णायकों ने इसकी उपयोगिता और तकनीकी समझ की प्रशंसा की।

इस सफलता में शिक्षिका नम्रता कुमारी, एसजी अंजली महतो और विज्ञान शिक्षक प्रणव मर्दिना का विशेष योगदान रहा। सभी शिक्षकों ने छात्राओं को हर स्तर पर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया, जिसके परिणामस्वरूप यह उपलब्धि संभव हो सकी।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने भी छात्राओं की इस उपलब्धि पर गर्व जताया है। उनका कहना है कि इस तरह की सफलता से क्षेत्र के अन्य बच्चों को भी प्रेरणा मिलेगी और वे भी शिक्षा व नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

गुड़ाबांदा प्रखंड के लिए यह उपलब्धि गर्व का विषय बन गई है। छात्राओं ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्र में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उसे सही दिशा और मार्गदर्शन की जरूरत होती है।