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बहरागोड़ा विराट हिंदू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब, एकता का संदेश

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बहरागोड़ा। संवाददाता

रविवार को बहरागोड़ा के नेताजी सुभाष शिशु उद्यान स्थित शाखा मैदान में ‘समस्त हिंदू समाज’ के तत्वावधान में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन भव्य और ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुआ। इस आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम स्थल पर भक्ति, आस्था और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही लोग पारंपरिक परिधानों में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने लगे थे, जिससे वातावरण पूरी तरह धार्मिक और उत्सवमय हो गया।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज में एकता, संगठन और सांस्कृतिक जागरूकता को मजबूत करना था। कार्यक्रम के दौरान लोगों ने एकजुट होकर सनातन धर्म की रक्षा और सामाजिक समरसता को बनाए रखने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में अनुशासन, उत्साह और आस्था की झलक साफ दिखाई दी।

कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह एक भव्य कलश यात्रा के साथ किया गया। इस यात्रा में सैकड़ों महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लिया। सिर पर कलश धारण कर वे धार्मिक गीतों के साथ पूरे उत्साह से चल रही थीं। कलश यात्रा शाखा मैदान से शुरू होकर विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए पुनः कार्यक्रम स्थल पर पहुंची।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखा गया। जगह-जगह लोगों ने यात्रा का स्वागत किया और वातावरण ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा। इस कलश यात्रा ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया और मुख्य कार्यक्रम के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार किया।

सम्मेलन के मुख्य वक्ता डॉ. देवाचार्य महाराज ने अपने ओजस्वी और प्रेरणादायक संबोधन से उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को सबसे अधिक आवश्यकता एकजुट रहने की है।

उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा, “सांघे शक्ति कलियुगे”, जिसका अर्थ है कि कलियुग में संगठन ही सबसे बड़ी शक्ति है। यदि समाज संगठित रहेगा, तो वह हर चुनौती का सामना कर सकता है और सुरक्षित रह सकता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे आपसी मतभेदों को भुलाकर एकता के सूत्र में बंधें और समाज की मजबूती के लिए मिलकर कार्य करें।

अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि वैदिक सनातन धर्म केवल एक धर्म नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद की आत्मा है। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म का मूल संदेश प्रेम, शांति और सह-अस्तित्व है।

उन्होंने यह उदाहरण भी दिया कि आज विश्व के कई विकसित देशों के लोग आधुनिक जीवनशैली से ऊबकर सनातन परंपराओं और भगवान कृष्ण की भक्ति की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसका कारण यह है कि सनातन धर्म जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने का मार्ग दिखाता है।

कार्यक्रम के दौरान मंच पर उपस्थित अन्य संतों और समाजसेवियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इनमें सत्य प्रकाश, देवेशानंद सरस्वती महाराज, सुसेन पात्र, तपन महाराज, लक्ष्मी नारायण दास, रामकृष्ण धाड़ा, कार्तिक महाराज, भानु कुमार और आशुतोष मिश्रा प्रमुख रूप से शामिल थे।

सभी वक्ताओं ने एक स्वर में समाज को एकजुट रहने, अपनी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने तथा नई पीढ़ी को इन मूल्यों से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जब समाज अपनी जड़ों से जुड़ा रहेगा, तभी वह मजबूत और समृद्ध बन सकेगा।

कार्यक्रम का सफल संचालन मनोज कुमार गिरि द्वारा किया गया। पूरे आयोजन के दौरान व्यवस्था अत्यंत अनुशासित और सुव्यवस्थित रही। स्वयंसेवकों ने भीड़ को नियंत्रित करने, लोगों को मार्गदर्शन देने और कार्यक्रम को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम के अंत में हजारों श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। लोग शांतिपूर्वक पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण करते नजर आए। इस दौरान भी पूरे वातावरण में भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संतुलन देखने को मिला।

समापन के समय पूरा क्षेत्र ‘जय श्रीराम’ और सनातन धर्म के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। यह नजारा इस बात का प्रतीक था कि समाज में एकता और धार्मिक आस्था कितनी गहराई से जुड़ी हुई है।

इस विराट हिंदू सम्मेलन ने न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त किया, बल्कि समाज में एकता और संगठन का भी स्पष्ट संदेश दिया। कार्यक्रम ने यह साबित किया कि जब समाज एकजुट होता है, तो वह किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम होता है।

इस तरह का आयोजन न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में सहायक होता है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी पहचान और मूल्यों से जोड़ने का भी कार्य करता है। बहरागोड़ा में आयोजित यह सम्मेलन लंबे समय तक लोगों के मन में अपनी छाप छोड़ने वाला साबित हुआ।