जमशेदपुर, 22 मई। भारतीय जनता पार्टी जमशेदपुर महानगर द्वारा पुण्यश्लोक लोकमाता रानी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन गुरुवार को बिष्टुपुर स्थित माइकल जॉन ऑडिटोरियम में भव्यता के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और रानी अहिल्याबाई के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई।
संगोष्ठी में झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो, पूर्वी विधायक पूर्णिमा साहू, प्रदेश मंत्री नंदजी प्रसाद, पूर्व सांसद आभा महतो समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मंच पर उपस्थित रहे।
रानी अहिल्याबाई का जीवन बना प्रेरणा स्रोत
मुख्य अतिथि बाबूलाल मरांडी ने कहा कि रानी अहिल्याबाई होल्कर का जीवन सुशासन, धर्मनिष्ठा और जनसेवा का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “रानी अहिल्याबाई का जीवन सामाजिक न्याय और नारी सशक्तिकरण का आदर्श उदाहरण है। कांग्रेस ने इनके योगदान को दबाने का कार्य किया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऐसे राष्ट्रनायकों को देश पुनः सम्मान दे रहा है। यह आयोजन ‘शक्ति की आराधना’ है।”
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार अहिल्याबाई की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए समर्पित है।
सांसद और विधायक ने भी रखे विचार
सांसद विद्युत वरण महतो ने कहा कि रानी अहिल्याबाई ने शासन में रहते हुए जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और धार्मिक स्थलों के संरक्षण में ऐतिहासिक योगदान दिया। विधायक पूर्णिमा साहू ने उन्हें “स्त्री शक्ति और धर्मनिष्ठ शासन की प्रतीक” बताया और कहा कि उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर सहित कई ध्वस्त मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया, जिससे भारत की सांस्कृतिक विरासत को नया जीवन मिला।
नेताओं और कार्यकर्ताओं की भारी भागीदारी
इस अवसर पर महानगर अध्यक्ष सुधांशु ओझा ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि रानी अहिल्याबाई के विचार आज भी हमारे लिए मार्गदर्शक हैं। मंच संचालन जिला महामंत्री अनिल मोदी और धन्यवाद ज्ञापन जिला उपाध्यक्ष संजीव सिन्हा ने किया।
कार्यक्रम में पूर्व जिला अध्यक्ष देवेंद्र सिंह, अभय सिंह, गुंजन यादव, मिथिलेश सिंह यादव, राजेश शुक्ल, अनिल सिंह, कल्याणी शरण, मुरलीधर केडिया, रमेश हांसदा, नीलू मछुआ समेत विभिन्न मंडलों के सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। संगोष्ठी का माहौल प्रेरणादायक और भावनात्मक रूप से ओत-प्रोत रहा।