कटक, ओडिशा:
ओडिशा की धरती पर परंपरा और संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिला, जब कटक में ऐतिहासिक ‘बाली यात्रा’ का शानदार आगाज़ हुआ। रविवार को हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस विश्व प्रसिद्ध मेले का हिस्सा बने। यह आयोजन ओडिशा की समृद्ध समुद्री विरासत और गौरवशाली व्यापारिक इतिहास को समर्पित है। आयोजकों के अनुसार, इस बार मेले में 5 लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

राज्य के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर महानदी के तट स्थित गड़ागाड़िया घाट पर सात दिवसीय बाली यात्रा का शुभारंभ किया। यह आयोजन न केवल ओडिशा की पहचान है, बल्कि ‘साधबों’ की समुद्री यात्राओं की याद भी दिलाता है, जो कभी बाली, सुमात्रा और दक्षिण-पूर्व एशिया तक व्यापार करते थे।
भारत के प्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट एवं पद्मश्री सुदर्शन पटनायक ने मेले के निचले मैदान में 50 फीट लंबी और 30 फीट चौड़ी नाव की शानदार कलाकृति प्रदर्शित की, जिसे 12,000 सुपारी, 500 नारियल और 1,100 दीयों से सजाया गया था। उन्होंने कहा, “यह कलाकृति ओडिशा की समुद्री विरासत और ‘साधबों’ की भावना को मेरी श्रद्धांजलि है।”

मेले में परंपरागत ‘बोइता वंदना’ की झलक देखने को मिली, जब सजी हुई नाव सिल्वर सिटी बोट क्लब से नेवल जेट्टी होते हुए बैष्णब पाणी मंच तक रवाना हुई। यह प्राचीन व्यापारिक यात्राओं का प्रतीकात्मक पुनरावर्तन था।
इस वर्ष की बाली यात्रा 60 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है, जिसमें 2,500 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें से 530 स्टॉल ओडिशा रूरल डेवलपमेंट एंड मार्केटिंग सोसाइटी (ORMAS) द्वारा लगाए गए हैं, जो राज्य के हस्तशिल्प, वस्त्र, कलाकृतियों और पारंपरिक व्यंजनों को प्रदर्शित कर रहे हैं।
कटक की एडीएम इप्सिता मिश्रा ने बताया, “इस बार 75 लाख से अधिक आगंतुकों की उम्मीद है। नई सुविधाओं और आकर्षणों के कारण यह अनुभव हर आगंतुक के लिए यादगार रहेगा।” इस बार का प्रमुख आकर्षण विंटेज कार प्रदर्शनी है, जिसमें लगभग 50 क्लासिक और हेरिटेज वाहन प्रदर्शित किए जाएंगे।
संस्कृति अधिकारी लिनीकांत साहू ने कहा, “बाली यात्रा ओडिशा की समुद्री संस्कृति का सबसे बड़ा उत्सव है। स्थानीय कलाकारों के प्रदर्शन और ‘कटक इन कटक’ जैसे विशेष मंडपों के जरिए हम ओडिया अस्मिता का गर्व दिखा रहे हैं।”
यह मेला ओडिशा की सांस्कृतिक समृद्धि और व्यापारिक इतिहास का जीवंत प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री की नई पहल से इस आयोजन को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।