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बिहार चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज: हेमंत सोरेन–अशोक चौधरी मुलाकात के सियासी मायने, JMM की नाराजगी खुलकर सामने आई

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रांची/पटना, 14 जून 2025 | राजनीतिक संवाददाता
भले ही बिहार विधानसभा चुनाव राज्य तक सीमित हों, लेकिन इसकी गूंज अब झारखंड की राजनीति में भी साफ सुनाई देने लगी है। चुनावी सुगबुगाहट के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सक्रियता और राजनीतिक संकेतों ने गठबंधन की राजनीति में हलचल मचा दी है।

हेमंत सोरेन–अशोक चौधरी की ‘शिष्टाचार भेंट’ या रणनीतिक कदम?

बीते शुक्रवार, 13 जून को बिहार सरकार के भवन निर्माण मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता डॉ. अशोक चौधरी ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसे ‘शिष्टाचार भेंट’ बताया और दोनों नेताओं की मुस्कुराती तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा की गईं।

लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह मुलाकात सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखी जा रही है — खासकर तब, जब JMM खुद को बिहार महागठबंधन में लगातार नजरअंदाज महसूस कर रहा है।

JMM को पटना बैठक से बाहर रखने पर पार्टी की नाराजगी खुलकर सामने आई

गौरतलब है कि ठीक एक दिन पहले, 12 जून को पटना में महागठबंधन की अहम बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस, राजद और अन्य दल शामिल हुए — लेकिन JMM को न्योता नहीं दिया गया।

इस पर JMM महासचिव विनोद कुमार पांडे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:

“पार्टी ने बिहार चुनाव में गठबंधन के तहत उतरने का फैसला किया है, लेकिन बार-बार हो रही बैठकों से हमें बाहर रखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”

क्या JMM बिहार में खेलने जा रहा है ‘स्वतंत्र राजनीतिक कार्ड’?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हेमंत–अशोक चौधरी की भेंट, सिर्फ ‘शिष्टाचार’ नहीं, बल्कि JMM की रणनीतिक प्रतिक्रिया भी हो सकती है। यह संकेत हो सकता है कि JMM अब बिहार की राजनीति में सिर्फ सहायक नहीं, बल्कि फ्रंटलाइन खिलाड़ी की भूमिका में आना चाहता है।

गठबंधन की एकता पर उठने लगे सवाल

झारखंड में अभी JMM–कांग्रेस–राजद की साझा सरकार है। लेकिन अगर बिहार में JMM को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो यह गठबंधन सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि बिहार की रणनीति पर भी असर डाल सकता है।

राजनीतिक भविष्य को लेकर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं:

क्या JMM अपने विकल्पों की तलाश में है?

क्या गठबंधन की दरार अब सार्वजनिक रूप ले चुकी है?

और क्या बिहार में JMM की भूमिका अब निर्णायक बनने वाली है?

इन सवालों के जवाब आने वाले हफ्तों में सामने आ सकते हैं, लेकिन इतना तय है कि बिहार का चुनावी संग्राम अब झारखंड की सरजमीं पर भी तेज़ सियासी तुफान बन चुका है।