रांची/: बिहार के पूर्णिया जिले में हाल ही में हुई 5 आदिवासियों की हत्या ने न सिर्फ बिहार की राजनीति को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि इसका असर झारखंड की सियासत में भी गूंजने लगा है। इस घटना ने आदिवासी मुद्दे को केंद्र में लाकर राजनीतिक दलों को नई दिशा देने का काम किया है। आने वाले बिहार विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घटना को लेकर सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बिहार सरकार से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की। इसके बाद झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने भी राज्य से एक प्रतिनिधिमंडल को पूर्णिया भेजने की मांग उठाई। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि झारखंड की हेमंत सरकार इस घटना को हल्के में नहीं ले रही।
बिहार की राजनीति में jmm तलाश रही अपनी संभावनाएं
इस राजनीतिक हलचल के केंद्र में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) है, जो अब बिहार की राजनीति में अपनी संभावनाएं तलाशता दिख रहा है। सूत्रों की मानें तो JMM बिहार में कुछ विधानसभा सीटों पर महागठबंधन के तहत चुनाव लड़ने की योजना बना सकता है। पूर्णिया की घटना ने उसे आदिवासी समुदाय के समर्थन के जरिए बिहार की सियासत में प्रवेश का एक अवसर दे दिया है।JMM महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन राज्यों में बीजेपी या उसकी सहयोगी पार्टियों की सरकारें हैं, वहाँ आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्गों पर अत्याचार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस हत्याकांड में बिहार पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
कांग्रेस बीजेपी और नीतिश कुमार की सरकार पर हमलावर
तो वही इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी तेज़ी से प्रतिक्रिया दी है। बंधु तिर्की के नेतृत्व में एक जांच दल को पूर्णिया भेजा गया है, जो पीड़ित परिवारों से मुलाकात करेगा और पूरी घटना की पड़ताल करेगा। कांग्रेस भी इस मुद्दे को लेकर बीजेपी और नीतिश कुमार की सरकार पर हमलावर है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में सामाजिक समीकरण हमेशा से जाति आधारित रहे हैं। नीतिश कुमार ने भले ही अति पिछड़ा आयोग बनाकर कुछ संतुलन साधा हो, लेकिन पूर्णिया की घटना से उपजे जनाक्रोश को विपक्ष एक हथियार के रूप में देख रहा है। JMM और कांग्रेस जैसे दल इस मुद्दे को चुनावी रणनीति का हिस्सा बना सकते हैं। फिलहाल JMM की ओर से यह कहा गया है कि कांग्रेस की जांच टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही पार्टी अगला कदम तय करेगी। लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि झारखंड की सत्ता में काबिज JMM बिहार की राजनीतिक ज़मीन पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुट चुका है। झामुमो ने तो यह साफ कह दिया है कि बिहार के चुनाव में पार्टी 20सटों पर चुनाव लड़ेगी।
फिलहाल पूर्णिया की घटना बिहार की प्रशासनिक विफलता भर नहीं है, यह आने वाले चुनावों की सियासी चालों की शुरुआत भी है। और इसकी सबसे तीखी झलक अब झारखंड में देखने को मिल रही है, जहां से JMM आदिवासी अस्मिता के मुद्दे पर बिहार में अपनी राजनीतिक पैठ बनाना चाहता है।