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डुमरी विधायक जयराम महतो का सरकार पर प्रहार: प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा पर उठाए गंभीर सवाल

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रांची। झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में प्रवासी मजदूरों की परेशानियों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। डुमरी के विधायक जयराम महतो ने राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि झारखंड के प्रवासी मजदूर लगातार संकट झेल रहे हैं, लेकिन सरकारी मशीनरी पूरी संवेदनशीलता के साथ काम नहीं कर रही।

विधायक जयराम महतो ने सदन को बताया कि बगोदर क्षेत्र के पांच मजदूर अफ्रीकी देश नाइजर में आतंकी समूहों के चंगुल में फंसे हुए हैं। उनके परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं—न भोजन की व्यवस्था है, न कोई सरकारी सहायता।
महतो ने कहा कि परिजन लगातार उनसे गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री से मिलवाया जाए ताकि जल्द समाधान निकल सके।

उन्होंने सदन में यह भी बताया कि झारखंड के निवासी विजय कुमार की मौत सऊदी अरब में हो चुकी है और उनका शव पिछले 50 दिनों से वहीं पड़ा हुआ है
महतो के अनुसार, परिजन बार-बार मदद की अपील कर चुके हैं मगर अब तक सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

महतो ने कहा—“झारखंड के प्रवासी मजदूर हमारी आर्थिक शक्ति हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है।”

विधायक ने बताया कि गढ़वा, चतरा, पलामू समेत कई जिलों के लोग प्रवासी संकट को लेकर उनसे संपर्क करते हैं।
सदन में वे लगातार निवेदन जमा करते हैं, पर कई विभाग समय पर जवाब ही नहीं देते।
उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए जो जनता के मुद्दों को गंभीरता से नहीं लेते।

महतो ने कहा कि उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के कई प्रखंडों से आंकड़े जुटाए हैं, जिनमें प्रवासी मजदूरों का प्रतिशत 70 से 75 के बीच पाया गया।
उन्होंने कहा कि पलायन झारखंड की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी चुनौती है और वे हर सत्र में इस विषय को प्राथमिकता से उठाते हैं।

सरकार की सात गारंटियों पर निशाना साधते हुए जयराम ने कहा कि जमीनी स्तर पर योजनाओं का असर बेहद कम दिखाई देता है।
उन्होंने कहा—“सरकार की घोषणाओं और वास्तविक हालात में भारी अंतर है।”

अपनी हाल ही में हुई 180 किलोमीटर लंबी पदयात्रा का जिक्र करते हुए महतो ने कहा कि कड़ाके की ठंड के बावजूद जनता का व्यापक समर्थन उन्हें मिला।
उन्होंने कहा कि यह जनविश्वास बताता है कि लोग अपने मुद्दों पर समाधान चाहते हैं और उनकी आवाज मजबूत है।

विधायक ने आश्वासन दिया कि वे प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, विदेशों में फंसे श्रमिकों की वापसी, और पलायन रोकने की नीति को लेकर सदन में लगातार आवाज उठाएंगे।
उन्होंने सरकार से अपील की कि संवेदनशीलता और तत्परता के साथ मजदूरों के जीवन से जुड़े मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई की जाए।