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पहलगाम से लेकर हरवान तक: ऑपरेशन महादेव की पूरी कहानी

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अबुआ खबर ब्यूरो : दर्दनाक हमला – 22 अप्रैल, बाइसारन वैलीसूर्य की पहली किरणें चाहें पूरी घाटी को रोशन कर रही थीं, लेकिन बाइसारन वैली उस दिन शोक से खामोश थी। यात्रीयो के साथ हुए भयंकर नरसंहार ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया।

धर्म पूछकर 26 पर्यटकों की निर्मम हत्या — वो दृश्य जिसे आज भी कोई भूल नहीं पा रहा।

इस हमले में TRF और लश्कर-ए-तैयबा के involvement की आशंका थी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों में गहरा सदमा गया।

सुराग का पीछा – पुलिस और खुफिया एजेंसियों की सात दिन की लीड

खुफिया विभाग ने सबसे पहले एक चालाकी भरी केंद्रित मेहनत शुरु की:

11 जुलाई को एक संदिग्ध सैटेलाइट फोन की लोकेशन मिली।

26 जुलाई को फिर वही फोन हरवान क्षेत्रों में सक्रिय दिखा।

यहां से शुरू हुई खुफिया टीम की मेहनत: फोन से भौगोलिक डाटा और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया, जिससे पता चला कि आतंकवादी वनों की ओर बढ़ रहे हैं।

हरवान जंगल की भूलभुलैया – ऑपरेशन ‘महादेव’

28 जुलाई की सुबह 6 बजे, हरवान जंगल के अंदर सेना, CRPF और J&K पुलिस ने मिलकर एक सर्च एंड केस ऑपरेशन शुरू किया।

आतंकवादी एक अस्थायी तम्बू में सो रहे थे — जिसे लो-प्रोफाइल रहने के लिए प्लास्टिक के छाते से कवर किया गया था।

खुफिया संकेतों की सहायता से की गई करवाई ने तम्बू का घेरा कस दिया।

सुबह 11:30 बजे एक तेज फायरिंग की शुरुआत हुई — और कुछ ही मिनटों में तीन Grade‑A आतंकवादी ढेर हो गए।

मारे गए आतंकी – पहचान और मायाजाल

तीनों आतंकवादियों में से एक थे Hashim Musa उर्फ सुलैमान जट्ट — पाकिस्तान के पूर्व कमांडो, पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड।

दूसरे थे Habib Tahir उर्फ अफगानी, जो Rawalakot (PoK) से थे और SLF एवं LeT से जुड़े थे।

तीसरे आतंकवादी Jibran भी पहले फैल्याडीन ऑपरेटर के रूप में शामिल था।

उनके पास से मिले थे पाकिस्तानी वोटर आईडी कार्ड, चॉकलेट और सिम — जिससे उनके पाकिस्तान से संबंध की पुष्टि हुई।

जब्ती और जांच – हथियार और सबूतों की कहानी

आतंकवादियों के कब्जे से बरामद सामान:

दो AK-47 राइफलें, एक अमेरिकी M4 कार्बाइन,

17 राइफल ग्रेनेड, भारी मात्रा में गोला-बारूद।

वाराणसी स्थित CFSL लैब की ballistic जांच में स्थापित हुआ कि यही हथियार पहलगाम हमले में इस्तेमाल हुए थे।

संसद का सवाल और जवाब – देश ने माना विजय

लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा:

“यह हमला भारत की आंतरिक सुरक्षा और मानवता के खिलाफ था। ऑपरेशन महादेव ने सिद्ध कर दिया कि भारत आतंक को कभी माफ नहीं करता।”

भावनाएँ और प्रतिक्रिया

पीड़ित परिवार
कई परिवारों ने इसे “न्याय की शुरुआत” करार दिया। एक प्रतिनिधि ने कहा — “अब सबको महसूस हो रहा है कि भारत आतंकवाद को भूल भी नहीं सकता, बल्कि पूर्ण रूप से खत्म करेगा।”

अंतरराष्ट्रीय मंच
UNSC ने पहली बार TRF का नाम पहलगाम हमले से जोड़ते हुए भारत की न्यायिक और कूटनीतिक सफलता मान्यता दी।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज किया और भारत पर “fabrications” का आरोप लगाया, लेकिन यह अपील अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी नहीं मानी जा रही।