25 दिसंबर 2025 को पूरे झारखंड और विशेष रूप से कोल्हान प्रमंडल में वीर शहीद निर्मल महतो की 75वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर युवा समाजसेवी और आंदोलनकारी श्री अमित महतो ने शहीद के पैत्रिक गांव उलीयान, पारडीह चौक और चामारिया गेस्ट हाउस पहुंचकर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए और भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

अमित महतो ने मीडिया से बातचीत में कहा कि शहीद निर्मल महतो का योगदान झारखंड आंदोलन और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने बताया कि 25 दिसंबर 1950 को जन्मे शहीद महतो ने अपने राजनीतिक जीवन में झारखंड मुक्ति मोर्चा के दूसरे राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला और छात्रों व युवाओं को आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
आज उनके संघर्ष के कारण ही झारखंड 15 नवंबर 2000 को बिहार से अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
अमित महतो ने यह भी कहा कि 8 अगस्त 1987 को झारखंड विरोधी ताकतों ने निर्मल महतो की हत्या कर दी थी, और आज तक उन्हें सरकारी तौर पर शहीद का दर्जा नहीं मिला है। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से आग्रह किया कि जल्द से जल्द शहीद निर्मल महतो को सरकारी शहीद दर्जा प्रदान किया जाए और उनके संघर्ष की गाथा को स्कूल और कॉलेज की पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जाए, ताकि युवा पीढ़ी उनके साहस और बलिदान से प्रेरित हो।

इस अवसर पर पारडीह निर्मल स्मारक समिति द्वारा पारडी स्कूल मैदान में ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन भी किया गया, जिसमें अमित महतो और अन्य युवाओं ने हिस्सा लिया और रक्तदान को प्रोत्साहित किया। मौके पर नारायण महतो, मानिक महतो, वीरेन महतो, शरद महतो, किरपा महतो, आकाश महतो, विकास महतो, कमल महतो, खोगेन महतो, लालटु महतो, भक्तरंजन महतो, नरेश महतो, कृष्णा जी सहित कई युवा उपस्थित रहे।
मंटू महतो ने कहा कि शहीद के स्मारकों का संरक्षण और रंग-रोगन कार्य टाटा कंपनी द्वारा किया जाना चाहिए, क्योंकि यह झारखंडीयों के लिए सम्मान का विषय है।
अमित महतो ने जोर देकर कहा कि जब बात झारखंड के वीर सपूतों और उनके बलिदान की हो, तो सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर उन्हें वास्तविक सम्मान देना चाहिए, न कि केवल जन्म जयंती पर पुष्प अर्पित करना।