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विशेष रिपोर्ट (भाग–4):वन विभाग की करोड़ों की योजनाएं नाकाम, नहीं थमा हाथियों का उपद्रव: वन विभाग पार्क बनाने में और हाथी धान खाने में मस्त, आम जन और किसान पस्त

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जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिला में सर्वाधिक हाथी प्रभावित चाकुलिया वन क्षेत्र में हाथियों के उपद्रव कम करने के लिए वन विभाग की करोड़ों की योजनाएं नाकाम साबित हुई हैं। इसलिए हाथियों का उपद्रव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। क्षेत्र की जनता के लिए हाथी एक त्रासदी बन गए हैं। सच तो यह है कि वन विभाग करोड़ों के पार्क बनाने में और हाथी खेतों में खड़ी गरमा धान खाने में मस्त हैं। वहीं हाथियों के उपद्रव से आम जनता और खासकर किसान पस्त है। अपनी फसल की रक्षा के लिए किसानों को रतजगा करनी पड़ रही है। फिलहाल 20 से 25 हाथी क्षेत्र में घूम-घूम कर उपद्रव मचा रहे हैं।

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इस वन क्षेत्र में हाथियों के उपद्रव को कम करने के लिए वन विभाग ने देश और विदेश से हाथी विशेषज्ञों की टीम को लाया। हाथियों के लिए कई योजनाएं शुरू की। हाथियों के भोजन के लिए वर्ष 2024 में हाथी दिवस पर बांस समेत अन्य प्रजाति के 1.15 लाख पौधों का रोपण करवाया।

मगर दुर्भाग्य है कि रोपित पौधे हाथियों के काम नहीं आए और भोजन के लिए हाथी शहर और गांव का रूख कर रहे हैं। हाथियों के उपद्रव कम करने के लिए वन विभाग ने हाथियों का उपद्रव कम करने के लिए वन विभाग ने एक अनोखी पहल की थी हाथियों से सुरक्षा के लिए मधुमक्खी पालन की शुरुआत की थी। चौठिया गांव में मधुमक्खी पालन के लिए ग्रामीणों को प्रशिक्षित किया गया था गांव के पास मधुमक्खी पालन के लिए बाक्स लगाए गए थे। इस योजना कि क्रियान्वयन के लिए हंबल बी संस्था को जिम्मा दिया गया था। आंधप्रदेश से सेरेना इंडिका प्रजाति की मधुमक्खियां बाक्सों में रखी गयी थीं।

ऐसा इसलिए किया गया था कि मधुमक्खियों कि आवाज और डंक के डर से हाथी गांव में नहीं घुसेंगे। परन्तु ये योजना भी उचित देख रेख के अभाव में दम तोड़ने लगी है। कई बाक्स जमीन पर गिरे पड़े हैं। हाथी प्रभावित इलाकों में वन विभाग के तहत सोलर लाइटें भी लगाई गई थीं। परन्तु कई जगहों पर लाईटें खराब पड़ी हैं। इनके अलावे हाथियों से सुरक्षा के लिए वन विभाग ने कई और योजनाएं शुरू की है।

आश्चर्य कि बात है कि हाथियों की निगरानी के लिए बनाए गए एलिफेंट वाच टावर भी बेकार पड़े हैं। मुटुरखाम, सुनसुनिया जंगल में और कालियाम में बनाए गए एलिफेंट वाच टावर से हाथियों कि निगरानी नहीं होती है। हाथी और इंसानों के बीच लगातार बढ़ रहे संघर्ष चिन्ता का विषय बन गया है।

इस संबंध में चाकुलिया के प्रभारी वन क्षेत्र पदाधिकारी दिग्विजय सिंह ने कहा कि खराब पड़ी योजनाओं को जल्द दुरुस्त किया जाएगा, ताकि हाथियों के उपद्रव पर नियंत्रण पाया जा सके।

अगले भाग में पढ़ें:
विश्व पर्यावरण दिवस और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत लगाए गए पौधों की जमीनी हकीकत—आखिर क्यों सूख रहे हैं पौधे और कहां गई हरियाली ?