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विशेष रिपोर्ट (भाग–3): 1.15 लाख पौधों का सच गांव-वार आंकड़े आए सामने, जमीन पर क्यों नहीं दिख रही हरियाली ?

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जमशेदपुर | विशेष पड़ताल

जमशेदपुर के चाकुलिया रेंज में हाथियों के भोजन और कॉरिडोर विकास के नाम पर लगाए गए 1.15 लाख पौधों को लेकर “अबुआ खबर” की पड़ताल में अब प्रत्येक गांव-वार डाटा सामने आया है। यह सूची बताती है कि कागज़ पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण दिखाया गया—लेकिन जमीनी हकीकत उससे मेल नहीं खाती।

मिली सूची के अनुसार, कई गांवों में सैकड़ों से लेकर हजारों पौधे लगाने का दावा है। प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:

पूरी पड़ताल समझने के लिए पढ़ें भाग– 1 और भाग–2 भी

विशेष रिपोर्ट: जमशेदपुर वन प्रमंडल में ‘पार्क’ के नाम पर करोड़ों का खेल, हाथी कॉरिडोर बनवाना भूला विभाग

विशेष रिपोर्ट (भाग–2 )जमशेदपुर के डीएफओ से सवाल: विश्व हाथी दिवस पर हाथियों के लिए रोपित 1.15 लाख पौधे अधिकारी खा गये या मवेशी चर गये?

मौरबेड़ा – 10,000
बेनाशोली – 5,000
जामबनी – 3,000
जमिरा – 2,000
धानघोरी – 2,000
जोभी – 2,000
भूतिया – 2,000
वन बेनाशोली – 2,000

डाकुई (1000), मुटूरखाम (1000), आमलागोड़ा (1000), मालखाम (1500), दुधकुंडी (1500), पुरनापानी (1000), वनकाटिया (1000), मिश्रीकाटा (1000), फालदोहा (1500), मांगड़ोशोल (1000), आमडांगरा (1500), बाघघोरी (1000), सालवाडीह (1000), चालुनिया (1500), माचाडीहा (1500), सालकागाड़िया (1000), जामडोहरी (1000), सिंदरी (1500), डोमरो (1500), जुगीशोल (1500), मालकुंडी (1000), कदमडीहा (1500), माटियाबान्धी (1000), भादुआकोचा (1500), उदाल (1500), मानिकबेड़ा (1000), खेजुरिया (1500), महुलीशोल (1000), बामनडीह (1000), आमदा (1000), बुआंगडीह (1000), घोषदा (1000), बुरुडीह (1000), दांदुडीह (1500), आसना (1000), कटुशोल (1500), सरडीहा (1000), कादोकोठा (1000), चांदुआ (1500), भंडारशोल (1000), गोहालडांगरा (1000), गोसावनी (1500), चंदनपुर (1500), खड़िकाशोली (1500), बड़ा गड़ियास (1000), चोड़ोईगोड़ा (1000), बेहड़ा (1000), ऊपरशोली (1000), तिलाबनी (1500), पलाशबनी (1000), बामनीशोल (1000) आदि।

लोधनबनी, लुगाहारा, केंदबनी, खेडुआ, कानीमहुली, खाड़नाय, बड़ामचाटी, नदाड़िया, चियाबांधी, स्वर्गछिड़ा, जमुआ, शालदोहा, मुढ़ाल, बड़ामारा, रांगामाटिया, दक्षिणशोल, बांकशोल, सांपधरा, हरिपुर, स्पुषकुंडी, केंदाडांगरी, कुलडीहा, पाकुड़िया, झाड़बेड़ा, बासाझोर, राजाबासा आदि।

इतना बड़ा गांव-वार डाटा यह दिखाता है कि:

लगभग हर गांव में पौधारोपण का दावा किया गया
कई जगह हजारों पौधे दिखाए गए

कई जगह पौधों का कोई अस्तित्व नहीं
कहीं सूखे या गायब निशान
न सुरक्षा, न फेंसिंग, न देखरेख

अगर इतने पौधे लगाए गए थे, तो आज दिख क्यों नहीं रहे?

सबसे बड़ा सवाल: 1.15 लाख का हिसाब कहां है?
क्या यह पूरी योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रही?
क्या गांव-वार आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए?
कितने पौधे आज भी जिंदा हैं?

अब तक वन विभाग की ओर से कोई स्पष्ट सर्वाइवल रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

हाथियों और ग्रामीणों पर असर

हाथियों को जंगल में भोजन देना
गांवों की ओर उनके मूवमेंट को रोकना

भोजन की कमी से हाथी गांवों में घुस रहे हैं

फसलें बर्बाद
घरों को नुकसान
लोगों की जान पर खतरा
वन विभाग से सीधे सवाल
गांव-वार लगाए गए पौधों का ग्राउंड वेरिफिकेशन कब होगा?
सर्वाइवल रेट क्या है?
जिन गांवों में हजारों पौधे दिखाए गए, वहां जमीन खाली क्यों है?
फंड कहां और कैसे खर्च हुआ?
विभाग का पक्ष अब भी नहीं मिला

इस मामले में वन प्रमंडल पदाधिकारी डॉ सबा आलम अंसारी से संपर्क की कोशिश की गई,
लेकिन खबर लिखे जाने तक उनका पक्ष नहीं मिल सका।

गांव-वार डाटा सामने आने के बाद मामला अब और गंभीर हो गया है।
यह सिर्फ पौधारोपण नहीं, बल्कि पर्यावरण और जन सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।

अगले भाग में:

क्या कह रहे हैं अंदरूनी सूत्र?
क्या सामने आएंगे फंड और फाइल के दस्तावेज?
और क्या यह मामला बनेगा बड़ा घोटाला ?