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झारखंड में पानी-पानी, देवघर में बूंद-बूंद की आस — जून 2025 का मॉनसून बना चर्चा का विषय”

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रांची | विशेष संवाददाता
झारखंड में जून 2025 का महीना बारिश के मामले में ऐतिहासिक साबित हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, इस साल जून में राज्यभर में औसतन 348.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई — जो सामान्य से 84% अधिक है। यह आंकड़ा पिछले 11 वर्षों का सबसे ऊंचा रिकॉर्ड है। हालांकि राज्य के कुछ जिलों में यह खुशी अधूरी रह गई है, जहां बारिश की कमी अब चिंता का कारण बन रही है।

पूर्वी सिंहभूम में सर्वाधिक वर्षा, रांची दूसरे स्थान पर

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले ने वर्षा के मामले में बाजी मारी है, जहां 607.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। पोटका, बहरागोड़ा, पटमदा और चाकुलिया जैसे प्रखंडों में मूसलधार बारिश ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। डिमना डैम में जलस्तर इतना बढ़ गया कि चार वर्षों बाद पहली बार इसके गेट खोलने पड़े।

राजधानी रांची भी पीछे नहीं रही, जहां 600.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई है — जो राज्य में दूसरा सर्वाधिक आंकड़ा है।


धान की खेती के लिए आदर्श स्थिति

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जून महीने में इतनी भरपूर बारिश धान की खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जा रही है। खेतों में जलभराव की स्थिति ने सिंचाई की चिंता को लगभग समाप्त कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार राज्य में धान उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।


देवघर समेत 5 जिलों में वर्षा की कमी

बारिश के इस रिकॉर्ड में देवघर, गोड्डा, पाकुड़, गढ़वा और साहिबगंज जैसे जिले अपवाद बने हुए हैं।

देवघर में जून में सामान्य से 29% कम वर्षा हुई है।

गोड्डा में 30%, पाकुड़ में 21%, गढ़वा में 8% और साहिबगंज में 13% की कमी दर्ज की गई है।

ये आंकड़े खासकर धान की बुआई कर रहे किसानों के लिए चिंता का विषय हैं। यदि जुलाई में भी बारिश की कमी रही, तो इन जिलों में कृषि पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।


डैम-नदियाँ लबालब, बाढ़ का खतरा

राज्य के प्रमुख डैम और नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। निचले इलाकों में जलभराव और आंशिक बाढ़ की स्थिति बन चुकी है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बरतने और राहत व बचाव दलों को अलर्ट पर रखा है।


अभी जारी रहेगा बारिश का दौर

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक झारखंड में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। यदि यह बारिश नियंत्रित मात्रा में होती रही, तो यह राज्य की खेती के लिए अत्यंत लाभदायक होगी। लेकिन अत्यधिक बारिश की स्थिति में बाढ़ का संकट और बढ़ सकता है।