रांची | जुलाई 2025 — झारखंड सरकार ने आगामी 16वीं जनगणना की तैयारियों को लेकर काम तेज कर दिया है। संभावना जताई जा रही है कि राज्य सरकार 31 जुलाई 2025 तक इस संबंध में अधिसूचना जारी कर सकती है। इस बार जनगणना को लेकर एक बड़ा सामाजिक और सांस्कृतिक निर्णय सामने आ सकता है — सरना धर्म कोड को शामिल करने की सिफारिश की जा सकती है।
राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने इस मुद्दे पर एक प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे आगामी कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि झामुमो और कांग्रेस जैसी पार्टियां लंबे समय से जनगणना में आदिवासी समुदाय के लिए अलग ‘सरना धर्म कोड’ की मांग करती आ रही हैं। राज्य विधानसभा इस पर पहले ही प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेज चुकी है।
जनगणना की संभावित समय-रेखा:
अगस्त 2025: जनगणना कर्मियों का प्री-टेस्ट
नवंबर 2025 – जनवरी 2026: मास्टर ट्रेनर और फील्ड ट्रेनर को प्रशिक्षण
जनवरी 2026: जनगणना प्रश्नों की अधिसूचना (गजट) प्रकाशित
फरवरी 2026: जनगणना कर्मियों की नियुक्ति प्रक्रिया
अप्रैल – सितंबर 2026: घरों की लिस्टिंग और फील्ड वर्क
दिसंबर 2026: जनगणना अधिकारियों को अंतिम प्रशिक्षण
1 मार्च 2027: देशभर में जनगणना की आधिकारिक शुरुआत
जनगणना के लिए केंद्र सरकार ने 16 जून 2025 को राजपत्र जारी किया था, जिसके बाद झारखंड सरकार ने भी पोर्टल पर प्रोफाइलिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिसूचना जारी होते ही फील्ड स्टाफ की तैनाती, घर सूचीकरण, और अन्य चरणबद्ध प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
सरना धर्म कोड क्यों अहम है?
आदिवासी संगठनों और कई राजनीतिक दलों का कहना है कि आदिवासी समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को अलग मान्यता दी जानी चाहिए। सरना धर्म कोड को जनगणना में शामिल करना इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
राज्य सरकार का यह प्रयास झारखंड के जनजातीय समुदायों की अस्मिता और पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर दर्शाने का अवसर बन सकता है।