रांची | अपडेटेड: 2 अगस्त 2025
झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन की हालत गंभीर है और उनका इलाज दिल्ली के अपोलो अस्पताल में जारी है। लेकिन सोशल मीडिया पर उनके निधन की झूठी खबरों ने पूरे राज्य में भ्रम फैला दिया है।
अफवाहों ने मचाया हड़कंप, श्रद्धांजलि पोस्ट कर रहे नेता तक
शनिवार सुबह से ही सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलने लगी कि मंत्री रामदास सोरेन का निधन हो गया है। कई नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने बिना पुष्टि के शोक संदेश साझा कर दिए। यहां तक कि कुछ पोस्ट बाद में डिलीट भी किए गए, लेकिन तब तक अफवाहें फैल चुकी थीं।
इलाज जारी, स्थिति गंभीर लेकिन नियंत्रण में
सूत्रों के अनुसार, शनिवार तड़के करीब 4 बजे रामदास सोरेन बाथरूम में गिर पड़े थे। बताया जा रहा है कि उन्हें हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हुई, जिसके बाद उन्हें जमशेदपुर के टाटा मोटर्स अस्पताल (TMH) ले जाया गया। वहां से उन्हें एयर एम्बुलेंस के जरिए दिल्ली स्थित अपोलो अस्पताल भेजा गया।
वर्तमान में उनके साथ उनके पुत्र और झामुमो प्रवक्ता कुणाल सड़ंगी मौजूद हैं। डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी में रखकर इलाज कर रही है, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया गया है।
अफवाहें बनीं मानसिक दबाव की वजह
इन अफवाहों से न सिर्फ जनता भ्रमित हुई है, बल्कि उनके परिजनों और समर्थकों की मानसिक स्थिति पर भी गंभीर असर पड़ा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने जनता से अपील की है कि झामुमो के आधिकारिक बयान या डॉक्टरों की पुष्टि के बिना किसी भी खबर पर विश्वास न करें।
शर्मनाक! JMM विधायक ने कर दी ‘शोक सभा’
इस बीच एक और विवाद खड़ा हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक मथुरा महतो ने मंत्री के निधन की पुष्टि से पहले ही शोक सभा आयोजित कर दी। इस सभा में मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई, जबकि सरकार की ओर से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई थी। यह जल्दबाज़ी और असंवेदनशीलता अब सवालों के घेरे में है।
पूरे राज्य में हो रही दुआएं
रामदास सोरेन झारखंड की राजनीति में एक अहम चेहरा हैं। शिक्षा मंत्री के रूप में उनकी सक्रिय भूमिका और कार्यों के लिए वे जाने जाते हैं। राज्यभर से उनके जल्द स्वस्थ होने की कामनाएं की जा रही हैं।
अपील: अफवाहों से बचें, सिर्फ आधिकारिक सूचना पर भरोसा करेंइस पूरे घटनाक्रम ने यह दिखा दिया है कि डिजिटल दौर में भ्रामक सूचनाएं कितनी तेजी से फैलती हैं और इससे समाज पर कैसा असर पड़ सकता है। एक मंत्री का जीवन दांव पर है और सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के श्रद्धांजलि देना न सिर्फ अनैतिक है, बल्कि खतरनाक भी।