नई दिल्ली। अबुआ खबर डेस्क
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर दो दिनों तक चली विस्तृत चर्चा के बाद 17 अप्रैल को मतदान कराया गया, लेकिन आवश्यक समर्थन न मिलने के कारण यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
मतदान के दौरान कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया। इनमें से 298 सदस्यों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया। हालांकि समर्थन में पर्याप्त संख्या दिखाई दी, लेकिन संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं हो पाया, जिसके चलते विधेयक गिर गया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
विधेयक के पारित न होने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। Janata Dal (United) ने इस पर निराशा व्यक्त की है। पार्टी के प्रवक्ता Neeraj Kumar ने कहा कि महिला आरक्षण लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है, लेकिन इसे पारित कराने के लिए व्यापक सहमति नहीं बन पाई।
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उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है और इसके लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के कारण इस मुद्दे पर सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण रहा।
महिला भागीदारी पर फिर छिड़ी बहस
इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर संसद और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस विषय पर सभी दलों को मिलकर काम करना होगा, ताकि भविष्य में इस तरह के विधेयकों को व्यापक समर्थन मिल सके।