साहिबगंज | 30 जून 2025
हूल दिवस के दिन अमर शहीद सिद्धो-कान्हू की जन्मभूमि भोगनाडीह एक बार फिर उबाल पर है। यहां आदिवासी ग्रामीणों और पुलिस बल के बीच हुई झड़प में दो पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। घटना के बाद से पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल है और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
🔴 कैसे भड़का विवाद?
विवाद की शुरुआत दो दिन पहले उस समय हुई जब सिद्धो-कान्हू के वंशज मंडल मुर्मू ने 30 जून को भोगनाडीह स्टेडियम में हूल दिवस पर कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की थी। आयोजन के लिए प्रशासन से लिखित अनुमति मांगी गई थी, लेकिन अनुमति नहीं मिली। इसके बाद आदिवासी समाज में गहरा रोष फैल गया।
प्रशासन द्वारा बाद में मौखिक अनुमति दी गई, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि शनिवार रात को प्रशासनिक कार्रवाई के तहत उनके मंच को क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जिससे आक्रोश और बढ़ गया।
झड़प में तीर चले, पुलिस ने छोड़ी आंसू गैस
रविवार सुबह जैसे ही कार्यक्रम स्थल पर लोग जुटे, विरोध-प्रदर्शन तेज हो गया और स्थिति ने हिंसक रूप ले लिया। आदिवासी प्रदर्शनकारियों की ओर से तीर चलाए गए, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात बेकाबू होते देख पुलिस को बल प्रयोग और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, गोली चलने की भी अपुष्ट सूचना है, हालांकि प्रशासन ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
हालात बेहद तनावपूर्ण, भारी बल की तैनाती
घटना के बाद भोगनाडीह गांव में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। गांव के मांझी और अन्य ग्रामीण अब भी मंडल मुर्मू के समर्थन में डटे हुए हैं। प्रशासन लगातार स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है।
📌 प्रशासन की नजर बनी हुई है
वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए संवाद का प्रयास किया जा रहा है और किसी भी उकसावे या हिंसा को सख्ती से नियंत्रित किया जाएगा।