चाकुलिया संवाददाता (रोहन सिंह) | 30 जून 2025
हूल दिवस के अवसर पर नया बाजार स्थित नाना बाबा मंदिर के समीप फूलो-झानो चौक पर सोमवार को एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब प्रखंड प्रमुख भुवनेश्वर करुणामय ने 1855 की संथाल क्रांति की वीरांगनाएं फूलो और झानो की प्रतिमा का अनावरण किया।
इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, जनप्रतिनिधि और महिला-पुरुष उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत माल्यार्पण और पुष्पांजलि से हुई, जिसमें अतिथियों ने वीरांगनाओं को नमन किया।
🔸 फूलो-झानो: क्रांति की स्त्रैण शक्ति का प्रतीक
मुख्य अतिथि भुवनेश्वर करुणामय ने अपने संबोधन में कहा:
“फूलो और झानो ने संथाल परगना में ब्रिटिश शासन के खिलाफ जो अद्भुत साहस दिखाया, वह आज भी महिला सशक्तिकरण और जनविरोध की सबसे बड़ी मिसाल है। उन्होंने सिर्फ नेतृत्व ही नहीं किया, बल्कि युद्ध की रणनीति तैयार कर सिदो-कान्हू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी।”
उन्होंने कहा कि हूल विद्रोह केवल पुरुषों की लड़ाई नहीं थी, बल्कि महिला क्रांतिकारियों की भी उतनी ही भागीदारी रही है।

🔸 सामाजिक एकता और चेतना का संदेश
झामुमो प्रखंड अध्यक्ष शिव चरण हांसदा, अमर हांसदा, भृति सुंदर महतो, विशाल बारीक, गौतम शर्मा, सुनाराम बास्के, उदय टुडू, रामदास हेंब्रम समेत कई स्थानीय नेता, समाजसेवी और नागरिक इस अवसर पर उपस्थित रहे।
महिला सहभागिता भी विशेष रही। बसंती बास्के, चंपा मांडी, स्वाति मुंडा, सपना हेंब्रम जैसी अनेक महिलाओं ने वीरांगनाओं की विरासत को सम्मान देने हेतु कार्यक्रम में भागीदारी की।
📌 सांस्कृतिक स्मृति को जीवंत करता यह आयोजन
फूलो-झानो की प्रतिमा का अनावरण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह आदिवासी अस्मिता, साहस और संघर्ष की गाथा को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बना। आयोजकों ने बताया कि यह स्थल अब जनजागरूकता और प्रेरणा का प्रतीक बनेगा।