चाकुलिया | संवाददाता (रोहन सिंह)
हूल दिवस के अवसर पर सोमवार को चाकुलिया प्रखंड स्थित मेम क्लब के पास आयोजित एक भावपूर्ण कार्यक्रम में संथाल विद्रोह के महानायक शहीद चानकू महतो को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का आयोजन शहीद चानकू महतो स्मारक समिति द्वारा किया गया।
मूर्ति पर माल्यार्पण कर किया नमन
समिति के सदस्यों ने चानकू महतो की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया और उनके बलिदान को याद किया। इस दौरान उपस्थित वक्ताओं ने चानकू महतो के योगदान को झारखंड के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है।
सिद्धो-कान्हो, चांद-भैरव के साथ लड़ा था संग्राम
समिति के सदस्यों ने जानकारी दी कि शहीद चानकू महतो ने 1855 के ऐतिहासिक संथाल हूल विद्रोह में सिद्धो-कान्हो, चांद-भैरव और फूलो-झानो के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ जबरदस्त संघर्ष किया था। वे इस जनविद्रोह के एक प्रमुख नेतृत्वकर्ता थे, जिन्होंने झारखंड की अस्मिता और स्वाभिमान के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
स्थानीय नागरिकों और समिति के सदस्यों की उपस्थिति
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, समाजसेवी और समिति सदस्य उपस्थित रहे। मुख्य रूप से हरिशंकर महतो, उत्तम महतो, सपन महतो, कोकिल चंद्र महतो, दिलीप महतो, चंदन महतो, टुलू साव, गिरीश महतो, जितेंद्र महतो, मनोरंजन महतो, शेखर महतो, शेखर गोप और नित्यानंद मोहंती जैसे गणमान्य लोगों ने भाग लिया।
शहीदों की विरासत को सहेजने का संकल्प
इस अवसर पर वक्ताओं ने यह भी संकल्प लिया कि शहीदों की विरासत को जीवित रखने और उनके आदर्शों पर चलने का कार्य लगातार जारी रहेगा। हूल दिवस जैसे आयोजन युवा पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने का माध्यम हैं।
📌 मुख्य बिंदु:
- चाकुलिया में हूल दिवस पर शहीद चानकू महतो को दी गई श्रद्धांजलि
- मूर्ति पर माल्यार्पण कर किया गया नमन
- चानकू महतो ने सिद्धो-कान्हो के साथ अंग्रेजों के खिलाफ किया था संघर्ष
- बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल, शहीदों की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प