चाकुलिया संवाददाता (रोहन सिंह) | 30 जून 2025
हूल क्रांति की गूंज आज भी झारखंड के गांव-गांव में सुनाई देती है। चाकुलिया प्रखंड अंतर्गत लोधाशोली पंचायत के नीमडीहा गांव में सोमवार को हूल दिवस पूरे परंपरागत उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया।
सुबह से ही गांव के पुरुष, महिलाएं और युवाओं ने पारंपरिक परिधान में सजकर हूल दिवस की तैयारी शुरू कर दी। ग्रामीणों का जत्था शहीद रंटु मुर्मू चौक पहुंचा, जहां पर पुजारी रघुनाथ मुर्मू ने विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात शहीद रंटु मुर्मू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
🔸 पूजा, प्रसाद और मांदर की थाप पर नृत्य
पूजा-अर्चना के बाद नीमडीहा फुटबॉल मैदान में सामूहिक रूप से हूल दिवस पूजा का आयोजन किया गया। पूजा के उपरांत उपस्थित लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
इसके बाद मांदर और धमसे की गूंज पर ग्रामीणों ने पारंपरिक हुल नृत्य प्रस्तुत किया। इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जीवंत और ऐतिहासिक बना दिया।
🔸 सामुदायिक सहभागिता रही विशेष
कार्यक्रम में वार्ड मेंबर दुर्गा मुर्मू, माताल हांसदा, ठाकुर दास मुर्मू, गोपाल मुर्मू, सनातन मुर्मू, रुपाई मुर्मू, बीर सिंह मुर्मू, चरण मुर्मू, जयकरण मुर्मू सहित अनेक ग्रामीण महिला-पुरुषों की उपस्थिति रही। सभी ने हूल क्रांति के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनकी स्मृति को नमन किया।
📌 हूल दिवस: संघर्ष और बलिदान की अमिट गाथा
1855 में सिद्धो-कान्हू, फूलो-झानो, चांद-भैरव और रंटु मुर्मू जैसे वीरों ने अंग्रेजी शासन और ज़मींदारी अत्याचार के विरुद्ध बिगुल फूंका था। हूल दिवस आज भी आदिवासी समाज की आत्मगौरव, संघर्ष और आत्मबलिदान की प्रतीक बनकर जीवित है।