अबुआ खबर डेस्क | चाकुलिया
चाकुलिया: चाकुलिया प्रखंड अंतर्गत श्यामसुंदरपुर थाना क्षेत्र में स्वर्णरेखा नदी के सभी प्रमुख बालू घाटों पर माफियाओं का कब्जा है। इन घाटों पर बालू माफियाओं का कानून चलता है। ग्राम सभा और तमाम कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए तथा प्रशासन की परवाह किए बिना बालू माफिया रोजाना 50 लाख से अधिक के राजस्व को चूना लगा रहे हैं। इस काले धंधे में पुलिस प्रशासन मौन समर्थक बना है। इसलिए बालू चोरी का यह खेल बड़े पैमाने पर रात और दिन जारी है। कई जगहों पर अवैध बालू का भंडारण है।
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जमशेदपुर में टास्क फोर्स की बैठक होती है। अधिकारी और पदाधिकारी बालू और पत्थर के अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए लिए रणनीतियां बनाते हैं। पदाधिकारियों को बालू और पत्थर के अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाने की हिदायत दी जाती है। मगर जमीन पर ऐसा कुछ नहीं होता है। स्वर्णरेखा नदी में बालू के अवैध खनन और राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या 18 पर हाइवा और ट्रैक्टरों से हो रहे अवैध बालू के परिवहन पर खनन विभाग और स्थानीय पदाधिकारी आंख, मुंह और कान बंद कर मौन व्रत धारण किए रहते हैं।
उल्लेखनीय हो कि पिताजुड़ी में राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या 18 के किनारे ही श्यामसुंदरपुर थाना है। अवैध बालू से लोड हाइवा और ट्रैक्टर थाना के सामने स्थित एनएच से गुजरते हैं। वहीं थाना से करीब डेढ़ सौ मीटर दूर पिताजुड़ी चौक है। पिताजुड़ी में हाईवे से गुड़ाबांदा जाने वाली प्रमुख सड़क है। श्यामसुंदरपुर, चंदनपुर और बालीजुड़ी स्वर्णरेखा नदी घाट से बालू लेकर वाहन इसी सड़क से यानी की थाना के बगल से गुजर कर हाईवे पर आते हैं। इसी तरह केरूकोचा में हाईवे 18 से बालीजुड़ी स्वर्णरेखा घाट जाने वाली सड़क है।
बालजुड़ी घाट से अवैध बालू लेकर वाहन इसी सड़क से गुजर कर केरूकोचा आते हैं और फिर अन्यत्र जाते हैं। ऐसे में यह बात साफ है कि श्यामसुंदरपुर थाना क्षेत्र में स्वर्णरेखा नदी से अवैध बालू लेकर सभी वाहन इन्हीं तीन सड़कों से गुजरते हैं। फिर बड़े पैमाने पर बालू का अवैध खनन और परिवहन खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। वैसे देखा जाए तो प्रशासन अपनी नाक बचाने के लिए या फिर कार्रवाई की खानापूर्ति के लिए यदा कदा बालू से लदे एक दो ट्रैक्टरों को जब्त कर या फिर अवैध बालू का भंडारण जब्त कर अपनी पीठ थपथपाता है।
उदाहरण के तौर पर पिछले नौ अप्रैल को प्रशासन ने बड़ागड़ियास के पास 2000 सीएफटी बालू जब्त किया था। यानी कि बालू की चोरी होती है 20 लाख सीएफटी की और जब्ती होती है 2000 सीएफटी की। प्रशासन द्वारा बालू जब्ती की सबसे खास बात यह है कि जब्त बालू को भी माफिया ले भागते हैं।
ऐसा कई बार हो चुका है। प्रशासन द्वारा बालू घाटों पर कभी छापामारी नहीं की जाती है। कुल मिलाकर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि पूर्वी सिंहभूम जिला में श्यामसुंदरपुर थाना क्षेत्र स्वर्णरेखा नदी से बालू चोरी का सबसे बड़ा हॉट स्पॉट बन गया है। यहां एक बात उल्लेखनीय है कि बालू की चोरी पर अंकुश नहीं लगाने के कारण इसके पूर्व के थाना प्रभारी को तत्कालीन एसएसपी ने लाइन हाजिर किया था।