जमशेदपुर | 30 जून 2025 हूल दिवस के अवसर पर उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने सोमवार को भूइयांडीह स्थित वीर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर उन्होंने हूल आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह विद्रोह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखने वाला एक क्रांतिकारी कदम था।
उपायुक्त ने कहा कि
“हूल विद्रोह केवल इतिहास की घटना नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की चेतना, संघर्ष और आत्मगौरव का प्रतीक है। सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो जैसे असंख्य वीरों ने अपने प्राणों की आहुति देकर आजादी की मशाल जलाने का कार्य किया।”
उन्होंने कहा कि – इन बलिदानियों के साहस, नेतृत्व और देशभक्ति से प्रेरणा लेकर हमें एक न्यायपूर्ण, समरस और समानता-युक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए।
“हूल दिवस हमें स्मरण कराता है कि झारखंड की धरती ने आजादी की लड़ाई में कितने अमूल्य योगदान दिए हैं। हमें उस बलिदान को याद रखते हुए, उस आदर्श के अनुरूप कार्य करना है।”
🔸 कार्यक्रम में जिले के वरीय पदाधिकारी, कर्मी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद थे। सभी ने वीर शहीदों की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर सम्मान प्रकट किया।
📌 हूल विद्रोह का संदर्भ 1855 में ब्रिटिश हुकूमत और ज़मींदारी शोषण के खिलाफ संथाल समाज ने जब विद्रोह किया, तो सिदो और कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में हजारों आदिवासियों ने अपनी जमीन, सम्मान और अस्तित्व की रक्षा के लिए बलिदान दिया। यह विद्रोह भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ पहला संगठित जन-आंदोलन था।
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