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नेताजी की मूर्ति चाकुलिया में बदहाल: क्या आज़ादी के नायक को मिलेगा सम्मान या यूं ही होती रहेगी अनदेखी?

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चाकुलिया, झारखंड:
“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा” — आज़ादी की लड़ाई में यह नारा बुलंद करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति आज खुद उपेक्षा की बेड़ियों में जकड़ी हुई है। चाकुलिया नगर पंचायत के वार्ड संख्या 11 में मुख्य बाज़ार के समीप स्थित नेताजी की यह प्रतिमा बदहाल स्थिति में है, और प्रशासन की बेरुखी के कारण धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होती जा रही है।

रेलवे की जमीन पर, बजबजाते नाले के किनारे खड़ी यह मूर्ति एक समय गौरव का प्रतीक थी, लेकिन अब यह चबूतरे में पड़ी दरारों और आसपास फैली गंदगी के कारण खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। चबूतरे के क्षतिग्रस्त होने से मूर्ति नाले की ओर झुक गई है, और आशंका जताई जा रही है कि यदि शीघ्र सुधार नहीं किया गया तो मूर्ति नाले में गिर सकती है।

जिम्मेदार कौन? रेलवे या नगर पंचायत?

इस गंभीर स्थिति को लेकर प्रशासनिक भ्रम की स्थिति बनी हुई है। चूंकि मूर्ति रेलवे की जमीन पर है, इसलिए रेलवे प्रशासन इसे सुधारने से बचता रहा है। दूसरी ओर, नगर पंचायत यह कहकर हाथ खींच लेता है कि जमीन उनकी सीमा में नहीं आती। दिलचस्प बात यह है कि केन्द्र सरकार की जमीन पर नगर पंचायत द्वारा लाखों की लागत से सड़क निर्माण कराया गया है अब सवाल यह उठता है कि जब केन्द्र सरकार की जमीन पर सड़क बन सकती है तो रेलवे की जमीन पर स्थापित मुर्ति का संरक्षण क्यों नही ?

स्थानीय लोगों की पीड़ा

स्थानीय नागरिकों ने कई बार रेल प्रशासन और नगर पंचायत को ज्ञापन सौंपकर मूर्ति के पुनर्स्थापन और जीर्णोद्धार की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों का कहना है कि नेताजी की यह प्रतिमा केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि चाकुलिया की अस्मिता और इतिहास का प्रतीक है।

क्या इस स्वतंत्रता दिवस तक कुछ बदलेगा?

अब जब स्वतंत्रता दिवस निकट है, यह सवाल और भी प्रासंगिक हो गया है — क्या आज़ादी के इस महानायक को वो सम्मान मिलेगा, जिसके वे हकदार हैं? या फिर नेताजी की मूर्ति यूं ही उपेक्षा और अनदेखी की प्रतीक बनी रहेगी?