चाकुलिया/बहरागोड़ा – झारखंड में रेत माफियाओं के हौसले दिन-ब-दिन बुलंद होते जा रहे हैं। ताजा मामला बहरागोड़ा प्रखंड के मुटूरखाम गांव के पास का है, जहां स्वर्णरेखा नदी पर माफियाओं ने ह्यूम पाइप और खाली ड्रमों की सहायता से अवैध पुल का निर्माण कर लिया है। इस पुल का उपयोग बालू की अवैध ढुलाई के लिए किया जा रहा है, जबकि एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) की सख्त रोक के बावजूद यह खेल खुलेआम जारी है।
खुल्लम-खुल्ला बालू का अवैध उत्खनन
ग्रामीणों के अनुसार, मुटूरखाम घाट पर पिछले एक महीने में भारी मशीनरी लगाकर दर्जनों ह्यूम पाइप, खाली ड्रम, मोरम और मिट्टी डालकर पुल तैयार किया गया है। इस पुल के जरिए नदी के दूसरे किनारे तक ट्रैक्टर और हाईवा जैसे भारी वाहन आसानी से पहुंच रहे हैं।
यहां से प्रतिदिन लगभग 100 ट्रैक्टर बालू चोरी कर पोलपोला खाल के किनारे भंडारित किया जाता है, फिर उसे डाबरा, केरूकोचा होते हुए चाकुलिया और जमशेदपुर तक भेजा जा रहा है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
स्थानीय ग्रामीण इस अवैध गतिविधि से परेशान हैं। उनका कहना है कि इससे पर्यावरण को नुकसान तो हो ही रहा है, साथ ही नदी की धारा और जलस्तर पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर आंख मूंदे हुए है, जबकि यह अवैध कारोबार सुबह से शाम तक लगातार जारी रहता है।
दो स्थानीय लोगों पर आरोप
सूत्रों के मुताबिक, चाकुलिया प्रखंड के केरूकोचा और हरिनिया गांव के दो लोग इस पूरे अवैध खनन नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि बहरागोड़ा, चाकुलिया और श्यामसुंदरपुर थाना की पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है।
लोगो ने मांग की है कि इस अवैध पुल को तुरंत ध्वस्त किया जाए और बालू माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। साथ ही जिन थाना क्षेत्रों में यह हो रहा है, वहां के अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाए।