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संदीप कुमार शाउ के नेतृत्व में ‘मैत्री संगठन’ बना ग्रामीण बदलाव की मिसाल

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बहरागोड़ा, संवाददाता (निलेश बेरा)
झारखंड के बहरागोड़ा प्रखंड क्षेत्र से निकला मैत्री संगठन आज झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के ग्रामीण इलाकों में सामाजिक चेतना और समर्पण की नई इबारत लिख रहा है। संगठन के सह-संस्थापक और सचिव संदीप कुमार शाउ के नेतृत्व में यह पहल ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, पर्यावरण और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रही है।

रक्तदान और स्वास्थ्य सेवा की अनूठी पहल

मैत्री संगठन ने “एक नया रक्तदाता” जैसे प्रेरक अभियानों के माध्यम से युवाओं को नियमित रक्तदान के लिए प्रेरित किया है। सैकड़ों ज़रूरतमंदों तक समय पर रक्त पहुँचाकर संगठन ने कई जीवन बचाए हैं।

महिला स्वास्थ्य और योग जागरूकता का अभियान

गांवों में मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियाँ तोड़ने के लिए संगठन विशेष शिविरों का आयोजन करता है। किशोरियों और महिलाओं को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही योग शिविरों के माध्यम से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी बढ़ावा मिल रहा है।

स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा में अग्रणी

मैत्री संगठन ने स्कूलों, मंदिरों और अस्पतालों में डस्टबिन वितरित कर स्वच्छता को बढ़ावा दिया है। इसके साथ ही फलदार और बरगद जैसे उपयोगी पौधों का वृक्षारोपण कर पर्यावरण सुरक्षा को भी नई दिशा दी है।

कृषि नवाचार से किसानों को नई राह

संगठन स्थानीय किसानों को वैज्ञानिक और जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। इससे न केवल पैदावार में वृद्धि हुई है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी बना हुआ है।

सदस्यों का समर्पण सीमाओं से परे

संगठन के सह-संस्थापक संदीप कुमार शाउ कोलकाता में एफएमसीजी सेक्टर में कार्यरत हैं, परंतु व्यस्तता के बावजूद गांव और समाज के लिए समर्पित रहते हैं।
अन्य सह-संस्थापक डॉ. सुमन घोष, जो एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक हैं, और पंकज करण, जो विदेशी कंपनियों में कार्यरत हैं — दोनों ही अपनी मातृभूमि के प्रति गहरे जुड़ाव के साथ सेवा में सक्रिय हैं।

पंकज पांडा, पार्बती शंकर बटव्याल और धर्मेन्द्र साव जैसे समर्पित सदस्य संगठन को मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं।

बहरागोड़ा बन रहा प्रेरणा का केंद्र

एक छोटे से कस्बे से शुरू हुई यह पहल आज ग्रामीण भारत में सामाजिक सेवा, चेतना और सतत विकास का प्रतीक बन चुकी है। संदीप कुमार शाउ के नेतृत्व में मैत्री संगठन अब बदलाव की वह मशाल बन चुका है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बन रही है।