जमशेदपुर, 30 जून 2025:
हूल क्रांति की अमर गाथा को नमन करने का दिन आ गया है। इस गौरवपूर्ण अवसर पर सोमवार, 30 जून को सुबह 9:30 बजे, भुइयाडीह स्थित सिद्धो-कान्हू की प्रतिमा पर जमशेदपुर उपायुक्त द्वारा माल्यार्पण कर हूल दिवस की श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
सिद्धो-कान्हू: आदिवासी स्वाभिमान और संघर्ष के प्रतीक
हूल दिवस हर वर्ष 1855 के उस क्रांतिकारी विद्रोह की याद दिलाता है, जब सिद्धो और कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में आदिवासी समाज ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संगठित विद्रोह छेड़ा था। यह आंदोलन केवल स्वाधीनता की मांग नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, अधिकार और सम्मान की एक आवाज़ थी।
सरकारी और सामाजिक प्रतिनिधियों की भागीदारी
कार्यक्रम में उपायुक्त के साथ जिले के प्रशासनिक पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा आम नागरिक उपस्थित रहेंगे। माल्यार्पण के माध्यम से सभी स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हुए, उनके सिद्धांतों पर चलने की प्रेरणा दी जाएगी।
हूल दिवस: इतिहास की वह गूंज जो आज भी जीवित है
यह दिवस हमें यह याद दिलाता है कि स्वतंत्रता केवल दिल्ली के सिंहासन पर बैठने वालों की नहीं, बल्कि जंगलों, खेतों और गांवों से निकली आवाज़ों की भी देन है। सिद्धो-कान्हू जैसे क्रांतिकारियों ने हमें यह सिखाया कि अन्याय के खिलाफ खड़ा होना ही असली स्वराज की शुरुआत है।
हाइलाइट्स:
- 30 जून को सुबह 9:30 बजे होगा माल्यार्पण
- भुइयाडीह में स्थित सिद्धो-कान्हू की प्रतिमा पर कार्यक्रम
- उपायुक्त करेंगे श्रद्धांजलि अर्पित
- प्रशासनिक, सामाजिक संगठनों की भागीदारी
- हूल क्रांति की स्मृति में आयोजित हो रहा कार्यक्रम