बहरागोड़ा, झारखंड।
बहरागोड़ा के चिकित्सा क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित हुआ है। सिटी नर्सिंग होम के निदेशक एवं वरिष्ठ लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. चंदन सिंह ने एक बेहद जटिल सर्जरी ‘गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी’ को सफलतापूर्वक अंजाम देकर एक मरीज की जान बचाई और स्थानीय स्वास्थ्य सेवा की क्षमता को एक नई पहचान दी।
जटिल बीमारी से जूझ रहा था मरीज
मरीज लंबे समय से गैस्ट्रिक आउटलेट ऑब्स्ट्रक्शन नामक गंभीर समस्या से पीड़ित था, जिसके कारण उसे खाया-पिया सब उल्टी के रूप में बाहर निकल जाता था। प्रारंभिक जांच बारीपदा में कराई गई, जहां से उसे कटक रेफर किया गया था। लेकिन मरीज के परिजनों ने डॉ. चंदन सिंह पर भरोसा जताते हुए बहरागोड़ा में ही इलाज कराने का निर्णय लिया।
आधुनिक तकनीक से जीवनदायिनी सर्जरी
डॉ. सिंह ने अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक के जरिए गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी सर्जरी को अंजाम दिया, जिसमें पेट को सीधे छोटी आंत के जेजुनम हिस्से से जोड़ा गया। इस बायपास प्रक्रिया से मरीज को भोजन पचाने की क्षमता पुनः प्राप्त हुई और वह अब सामान्य स्थिति में है।
परिजनों ने जताया आभार
मरीज के परिवार ने डॉक्टर और उनकी पूरी मेडिकल टीम का आभार जताते हुए कहा कि यह सर्जरी सिर्फ एक जीवन नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए उम्मीद की किरण बनी। उन्होंने कहा कि बहरागोड़ा जैसे छोटे कस्बे में इतनी जटिल सर्जरी का सफल होना एक बड़ी उपलब्धि है।
क्या है गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी?
गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी एक विशेष शल्य चिकित्सा है, जिसमें पेट से भोजन के प्रवाह को पुनः सुचारू करने के लिए पेट को सीधे छोटी आंत के एक भाग (जेजुनम) से जोड़ा जाता है। यह सर्जरी तब आवश्यक होती है जब पेट का प्राकृतिक मार्ग किसी अवरोध, जैसे कैंसर, पेप्टिक अल्सर या अन्य जटिल रोगों के कारण बाधित हो जाता है।
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के लाभ:
न्यूनतम चीरा और दर्द
कम रक्तस्राव
शीघ्र रिकवरी
संक्रमण का कम जोखिम
स्थानीय स्वास्थ्य सेवा में ऐतिहासिक उपलब्धि
यह सर्जरी न केवल एक मरीज के जीवन की रक्षा का उदाहरण है, बल्कि यह प्रमाण भी है कि बहरागोड़ा अब चिकित्सा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। डॉ. चंदन सिंह और उनकी टीम की यह उपलब्धि क्षेत्र के अन्य डॉक्टरों और संस्थानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।
यह सफलता बहरागोड़ा के मेडिकल क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।