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चाकुलिया: बीआरसी के गोदाम से नोटबुक और पुस्तकों की अवैध बिक्री का मामला, प्रशासन ने लिया गंभीर संज्ञान

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चाकुलिया चाकुलिया प्रखंड में बीआरसी के गोदाम से विद्यार्थियों को निःशुल्क वितरण के लिए रखी गई शैक्षणिक नोटबुक और पुस्तकों को अवैध रूप से कबाड़ी को बेचने के मामले ने जिले में सनसनी मचा दी है। इस मामले पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है।


प्राथमिकी दर्ज, आरोपी हिरासत में

बीआरसी के बीपीओ तरुण गिरी के बयान पर चाकुलिया थाना में नाइट गार्ड आदेशपाल सह नाइट गार्ड बापी दास, छोटा हाथी वाहन (जेएच 05 सीए 3261) के चालक रंजीत दास उर्फ लालटू दास तथा पूटन स्क्रैप टाल के मालिक के खिलाफ कांड संख्या 42/25 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। नाइट गार्ड बापी दास को पुलिस हिरासत में लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। इस गंभीर लापरवाही के कारण उसे तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है।


गोदाम और विद्यालयों के भवन सील

प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिन भवनों और विद्यालयों में ये पुस्तकें संग्रहित थीं, उन्हें तुरंत सील कर दिया है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की छेड़छाड़ न हो सके। साथ ही, चाकुलिया के प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी को 24 घंटे के भीतर मामले की स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए हैं।


पूरे जिले में जांच के निर्देश

जिला प्रशासन ने जिले के सभी प्रखंडों में पुस्तक वितरण व्यवस्था की गहन समीक्षा और जांच के आदेश दिए हैं। संबंधित वरीय पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने प्रखंडों में जांच कर शीघ्र प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। इसके अलावा, जिला स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है जो आगामी 48 घंटों में पूरी जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी।


शिक्षकों ने उठाए गंभीर सवाल

इस मामले को लेकर कई विद्यालयों के शिक्षकों ने भी नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि बीआरसी द्वारा विद्यार्थियों के लिए नोटबुक और पुस्तिकाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, जबकि अधिकारियों की ओर से कहा जाता रहा कि नोटबुक और पुस्तिकाएं समाप्त हो चुकी हैं। अब इस पूरे खेल की जड़ तक पहुंचने के लिए उच्च स्तरीय जांच की तैयारी हो रही है।


संदिग्ध खेल जारी, कई पदाधिकारियों पर लगे सवाल

सूत्रों की माने तो यह अवैध बिक्री का खेल कई दिनों से चल रहा था, जिससे कई पदाधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। आगामी जांच में कई उच्च पदस्थ अधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। प्रशासन इस मामले को पूरी गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।