Responsive Menu
Add more content here...

आजीविका मिशन से मिली नई राह: अनुसूचित जनजाति की गुरुवारी सबर बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

Spread the love

जमशेदपुर, 06 जून 2025
पोटका प्रखंड के झारिया गांव निवासी गुरुवारी सबर, जो अनुसूचित जनजाति समुदाय से हैं, आज आजीविका मिशन और अपनी मेहनत के दम पर आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं।

साधनों की कमी और आर्थिक तंगी के बावजूद गुरुवारी ने हार नहीं मानी। वर्ष 2018 में उन्हें झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन समाज (JSLPS) के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूह से जोड़ा गया। इस जुड़ाव ने उन्हें न केवल बचत और ऋण सुविधा प्रदान की, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाने का मौका दिया।

गुरुवारी ने 10 रुपये प्रति सप्ताह की बचत से शुरुआत की। बाद में उन्होंने समूह से 15,000 रुपये का ऋण लेकर मवेशी और मुर्गी पालन शुरू किया। व्यवसाय से हुई आमदनी से उन्होंने दोबारा 20,000 रुपये का ऋण लेकर अपने व्यवसाय को विस्तार दिया।

आज गुरुवारी सबर की वार्षिक आय ₹15,000 से ₹20,000 तक पहुँच चुकी है। उनका घर अब पशुपालन और मुर्गी पालन से स्थायी आमदनी का केंद्र बन चुका है।

PM-JANMAN अभियान के अंतर्गत आदिवासी समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में यह कहानी एक प्रेरक उदाहरण है। गुरुवारी ने न केवल स्वयं को सशक्त किया है, बल्कि अपने समुदाय की अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।

पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में चलाए जा रहे विकास कार्यक्रमों की यह एक सशक्त झलक है, जो महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही है।