जमशेदपुर, मानगो। कभी तंग गलियों में खेलता एक सामान्य सा लड़का, जिसे लोग हैदर के नाम से जानते थे, अब दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठनों का “इंजीनियर ऑफ़ टेरर” बन चुका है। इसी हैदर ने अपना नाम बदलकर अर्शियान रख लिया और आतंकवाद की तकनीकी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।
अर्शियान की कहानी बचपन से ही असामान्य थी। पढ़ाई में तेज़, उसने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी होने के बाद 2005 में बेंगलुरू पहुँचा और कुछ समय तक एक मदरसे में भी रहा। उस वक्त किसी को भी यह अंदाज़ा नहीं था कि यह साधारण युवक एक दिन अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों के लिए तकनीकी हथियार बन जाएगा।
साल 2008 में उसकी ज़िंदगी का रुख बदल गया। नौकरी की तलाश में सऊदी अरब गया, जहाँ उसने सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में काम करना शुरू किया। यहीं उसकी मुलाकात बेल्जियम की चेचन मूल की नागरिक अलीना हैदर से हुई। दोनों ने शादी की और एक बेटी भी हुई। इसी दौरान अर्शियान आईएसआईएस के संपर्क में आया और धीरे-धीरे उनके लिए काम करने लगा।
अर्शियान ने आतंकवाद की तकनीक में नई क्रांति ला दी। उसने आईएसआईएस के लिए आत्मघाती ड्रोन और छोटी दूरी की मिसाइलें डिजाइन कीं। यही कारण है कि उसे आतंक की दुनिया में “इंजीनियर ऑफ़ टेरर” कहा जाने लगा। इसके अलावा, उस पर अलकायदा से जुड़े होने का आरोप भी है।
आतंक का सिलसिला परिवार में भी जारी रहा। उसका भाई, सैयद मोहम्मद जीशान अली हैदर, भी इस रास्ते पर चला। उसे 2017 में सऊदी अरब से प्रत्यर्पित कर दिल्ली में गिरफ्तार किया गया।
वर्तमान में माना जा रहा है कि अर्शियान तुर्की में छिपा हुआ है और वहीं से आतंकवादी गतिविधियों को तकनीकी सहयोग दे रहा है। हाल ही में सीबीआई की अनुशंसा पर इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार, तुर्की में छिपा अर्शियान अब जल्द ही कानून की पकड़ में होगा।
जमशेदपुर की गलियों में खेलने वाला हैदर, आज अर्शियान के नाम से जाना जाता है, और इंटरपोल तक उसकी पहचान को लेकर चौकन्ना हो चुका है।