ढाका।
बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की अध्यक्ष और देश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया का मंगलवार को निधन हो गया। वह 80 वर्ष की थीं और लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। उनके निधन से बांग्लादेश की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है।
बेगम खालिदा जिया बांग्लादेश की राजनीति की सबसे प्रभावशाली महिला नेताओं में शुमार रही हैं। उन्होंने दो बार देश की कमान संभाली। उनका पहला कार्यकाल वर्ष 1991 से 1996 तक रहा, जबकि दूसरी बार वह 2001 से 2006 तक प्रधानमंत्री पद पर रहीं। वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री भी थीं।
राजनीतिक विरासत और पारिवारिक पृष्ठभूमि
बेगम खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1945 को हुआ था। उनके पति जियाउर रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य शासक रहे। उन्होंने ही बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की स्थापना की थी। वर्ष 1981 में जियाउर रहमान की हत्या के बाद पार्टी की जिम्मेदारी खालिदा जिया ने संभाली और लंबे समय तक बीएनपी को मजबूत राजनीतिक ताकत बनाए रखा।
उनके निधन के बाद अब पार्टी की कमान उनके पुत्र तारिक रहमान के हाथों में है। तारिक रहमान वर्तमान में बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और हाल ही में करीब 17 वर्षों के निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे थे।
शेख हसीना से रही तीखी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता
बांग्लादेश की राजनीति में खालिदा जिया और अवामी लीग प्रमुख शेख हसीना के बीच दशकों तक कड़ा टकराव देखने को मिला। दोनों नेताओं के बीच सत्ता संघर्ष देश की राजनीति की पहचान बन गया था। शेख हसीना के लंबे शासनकाल के दौरान खालिदा जिया को भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामलों में दोषी ठहराया गया, जिसके बाद वह लंबे समय तक नजरबंद रहीं।
पिछले वर्ष सत्ता परिवर्तन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने उन्हें रिहा किया था, लेकिन बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य के कारण वह सक्रिय राजनीति में वापसी नहीं कर सकीं।
विवादों से भी रहा नाता
प्रधानमंत्री रहते हुए उनके कार्यकाल को लेकर कई विवाद भी सामने आए। उन पर आरोप लगे कि उनके शासनकाल में कट्टरपंथी संगठनों को अप्रत्यक्ष समर्थन मिला और जमात-ए-इस्लामी जैसी ताकतों का प्रभाव बढ़ा। हालांकि, उनके समर्थक इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते रहे।
भारत से भी रहा राजनीतिक संपर्क
खालिदा जिया ने प्रधानमंत्री रहते हुए भारत का भी दौरा किया था। वर्ष 1992 में वह सार्क सम्मेलन के दौरान भारत आई थीं। इसके अलावा 2006 में अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत का आधिकारिक दौरा किया, जब भारत में मनमोहन सिंह की सरकार थी।
राजनीति में एक युग का अंत
बेगम खालिदा जिया के निधन को बांग्लादेश की राजनीति के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। समर्थक उन्हें एक मजबूत और संघर्षशील नेता के रूप में याद कर रहे हैं, वहीं आलोचक उनके कार्यकाल को विवादों से जोड़ते हैं। बावजूद इसके, बांग्लादेश की राजनीति में उनका योगदान हमेशा चर्चा में रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया शोक
बेगम खालिदा जिया के निधन पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि खालिदा जिया बांग्लादेश की राजनीति की एक प्रमुख हस्ती थीं, जिन्होंने देश के सार्वजनिक जीवन में अहम भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुख की इस घड़ी में भारत सरकार और भारतीय जनता बांग्लादेश की जनता तथा शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की कामना की।