बहरागोड़ा | अबुआ खबर संवाददाता (एन. बेरा)
बहरागोड़ा प्रखंड के किसानों पर इस साल दोहरी मार पड़ी है — पहले ‘मोंथा’ चक्रवात से आई तेज हवाओं और बे-मौसम बारिश ने खेतों को जलमग्न कर दिया, अब अज्ञात बीमारी और धोसा रोग ने फसलों को तबाह कर दिया है। धान की बालियां झुककर सड़ने लगी हैं, जिससे किसानों की सालभर की मेहनत मिट्टी में मिल गई है।
ग्रामीण इलाकों के किसानों — बी.एन. बेरा, रंजीत दास, मानस बेरा, श्रीधर बेरा, धनपति बेरा, बिकास महापात्र, गोदाधर नाइक, धुलिया गिरी, तरुण महतो, दलो कदली, हरिहर भगत, गोपाल सीट, मनोरंजन नायक, मंटू मुंडा, गोदा खामराई, ज्योति महतो, प्रबीर महतो, सुभाष मुंडा, मदनमोहन बेरा, बीजो देहरी और सत्यनारायण सिंह — ने बताया कि इस बार अच्छी धूप और समय पर सिंचाई के कारण उन्हें धान की बेहतरीन पैदावार की उम्मीद थी।
लेकिन कुछ ही दिनों में ‘मोंथा’ चक्रवात और लगातार हुई बारिश ने खेतों में पानी भर दिया। नतीजतन, फसलें गिर गईं और अब उनमें सड़न और झुलस की समस्या शुरू हो गई है। किसानों का कहना है कि अब जो भी फसल बचेगी, उसे बाजार में औने-पौने दाम पर बेचना पड़ेगा क्योंकि गुणवत्ता पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है।
“हमने पूरे साल मेहनत की, लेकिन अब खेतों में सिर्फ नुकसान नजर आ रहा है। अगर सरकार तुरंत राहत नहीं देती, तो आगे खेती करना मुश्किल हो जाएगा,” — किसानों ने कहा।
किसानों के चेहरों पर मायूसी साफ झलक रही है। अच्छी उपज और बेहतर दाम का सपना देखने वाले ये किसान अब सरकार से आपदा राहत और फसल मुआवजा की उम्मीद कर रहे हैं ताकि उनकी आर्थिक स्थिति थोड़ी सुधर सके।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन जल्द सर्वे कर नुकसान का आकलन करे और मुआवजा दे, तो वे अगली फसल के लिए फिर से तैयार हो सकेंगे।