बहरागोड़ा संवाददाता (निलेश बेरा):
पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने बहरागोड़ा प्रखंड क्षेत्र के किसानों की कमर तोड़ दी है। महुलडांगरी, बामडोल, गुहियापाल, रंगुनिया, पानीपड़ा समेत कई गांवों में करीब 300 एकड़ खेतों में लगी सब्जी की फसलें जलभराव और सड़न की चपेट में आ गई हैं।
इन गांवों के किसानों — जिनमें सौरूप घोष, शिव नाइक, हेमंत पैरा, मतिलाल पैरा, मंगलू नाइक, मानिक दंडपाट, शिबू नाइक, बुधु दंडपाट और कई अन्य — का कहना है कि इस बार खीरा, बैगन, झींगा, लौकी और बरबटी की बड़े पैमाने पर खेती की गई थी। लेकिन भारी बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया, जिससे पौधे सड़ने लगे हैं और उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
एक बीघा पर 30 हजार रुपये तक की लागत
किसानों ने बताया कि प्रति बीघा खेती में जुताई से लेकर कीटनाशक और सिंचाई तक लगभग 30,000 रूपए तक खर्च किया गया है। खीरा के पौधों से केवल एक बार ही फसल तोड़कर बेची जा सकी, इसके बाद बारिश ने पूरे खेत को जलमग्न कर दिया। कई खेतों में तो फसल तैयार होने के बाद भी उसे तोड़ना संभव नहीं हो पा रहा है क्योंकि कीचड़ और पानी से खेतों में पहुंचना मुश्किल हो गया है।
मंडी में बढ़ेंगे दाम, आम उपभोक्ता भी प्रभावित
किसानों के अनुसार, इस समय बाजार में खीरा 30 रूपए, बैगन 40 रूपए, झींगा 40 रूपएऔर बरबटी 60 रूपए प्रति किलो बिक रही थी। फसल बर्बाद होने के कारण अब इन सब्जियों की आपूर्ति प्रभावित होगी और बाजार में इनके दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। इससे न केवल किसानों को नुकसान होगा बल्कि आम जनता को भी महंगे दामों पर सब्जियां खरीदनी पड़ेंगी।
राहत की मांग
किसानों ने प्रशासन से नुकसान का आंकलन कर उचित मुआवजा देने और भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचाव के लिए स्थायी समाधान की मांग की है।