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9 जुलाई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल: मजदूर संगठनों और किसान मोर्चा की बड़ी घोषणा, झारखंड से होगा 28 हजार करोड़ का नुकसान

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रांची। 9 जुलाई को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के उद्देश्य से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राज्य कार्यालय के सभागार में एक संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और हड़ताल को लेकर विस्तृत जानकारी दी।

अशोक यादव, ऑल इंडिया ट्रेन यूनियन के राज्य सचिव ने बताया कि कल यानी 9 जुलाई को देशभर के मजदूर सड़क पर उतरेंगे। बैंक, एलआईसी और बीमा कंपनियों के कर्मचारी भी इस हड़ताल में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि भारत में पहले 8 घंटे काम और 8 घंटे आराम का सिद्धांत था, लेकिन अब मजदूरों को 12 घंटे काम करने के लिए बाध्य किया जा रहा है, विशेषकर महिलाओं को रात्रि पाली में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

महेंद्र पाठक ने कहा कि सरकार मजदूरों के अधिकार छीन रही है और उनके द्वारा कमाए गए पैसे पर भी टैक्स लगा रही है। सरकार की नीतियां जनविरोधी हैं, जिसमें गरीबों से टैक्स वसूलना और राशन में कटौती करना शामिल है। उन्होंने बताया कि हड़ताल का असर झारखंड के हर कोने में देखने को मिलेगा – संथाल परगना से लेकर पलामू तक, जहां CCL और BCCL जैसे उपक्रमों में भी काम ठप रहेगा।

हड़ताल से झारखंड को अनुमानित 28 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होने की बात भी सामने आई है।

सुनील शाह और सतीश कुमार, जो झारखंड बैंक यूनियन से जुड़े हैं, ने बताया कि 17 सूत्रीय मांगों को लेकर यह हड़ताल बुलाई गई है। प्रमुख मांगों में श्रम कानूनों की वापसी, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और काम के घंटे कम करना शामिल है। उन्होंने कहा कि एक ओर नेता चार-चार पेंशन ले रहे हैं, वहीं कर्मचारियों को ओल्ड पेंशन से वंचित रखा जा रहा है।

महेंद्र पाठक ने यह भी बताया कि हड़ताल का समर्थन कांग्रेस, झामुमो, तमाम दलों और संगठनों ने किया है। हवाई जहाज बनाने वाले से लेकर बैंक कर्मी तक, सभी कल हड़ताल पर रहेंगे। सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक जगह-जगह पर विरोध प्रदर्शन और रैलियों का आयोजन किया जाएगा।

यह हड़ताल केंद्र सरकार की श्रम विरोधी और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एक सशक्त संदेश देने के लिए की जा रही है।