राँची/जमशेदपुर।
पोटका विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजीव सरदार ने सोमवार को झारखंड विधानसभा के शून्यकाल में एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि टाटा स्टील के संचालन क्षेत्र में होने के बावजूद पोटका की लगभग 20 पंचायत आज भी बुनियादी नागरिक सुविधाओं के लिए तरस रही हैं। यह स्थिति उन ग्रामीणों के लिए और भी परेशान करने वाली है, जो वर्षों से टाटा समूह के स्थायी, संविदा या ठेका कर्मियों के रूप में कार्यरत हैं।
टाटा स्टील की परिधि में 20 पंचायत, फिर भी सुविधाओं का अभाव
विधायक ने बताया कि बागबेड़ा, घाघीडीह, कीताडीह, करनडीह, पुड़ीहासा, ब्यांगबिल, केरुवाडूंगरी सहित करीब 20 पंचायतें टाटा स्टील की 3–5 किलोमीटर परिधि के भीतर स्थित हैं। इसके बावजूद टाटा स्टील की ओर से इन क्षेत्रों में पेयजल, सफाई, बिजली, सड़क और अन्य नागरिक सुविधाओं की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है।
विधायक सरदार ने कहा कि इन क्षेत्रों के लोग वर्षों से इस उपेक्षा का शिकार हैं।
“मजदूर कंपनी को अपना खून-पसीना देते हैं, पर सुविधाओं से वंचित रहते हैं” — विधायक संजीव सरदार
विधायक ने सदन में कहा—
“इन पंचायतों के अधिकांश लोग टाटा स्टील के ही कर्मी हैं। कंपनी को अपना श्रम देने वाले इन परिवारों का अधिकार है कि उन्हें बेहतर पेयजल, स्वच्छता, बिजली और अन्य नागरिक सुविधाएँ मिलें। कंपनी को अपनी परिधि में आने वाले इन गांवों के लिए CSR के तहत स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।”
CSR के तहत स्थायी व्यवस्था की मांग
संजीव सरदार ने सरकार से आग्रह किया कि टाटा स्टील को स्पष्ट निर्देश दिया जाए कि वह पोटका विधानसभा के इन 20 पंचायतों में CSR के माध्यम से स्थाई नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था करे।
उन्होंने कहा कि ऐसा होने से पोटका के लगभग एक लाख से अधिक लोगों के जीवनस्तर में व्यापक सुधार आएगा और क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी।