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JSCA चुनाव पर न्यायिक संकट: अवैध वोटिंग के आरोपों के बीच हाईकोर्ट में चुनौती

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रांची। झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (JSCA) के वर्ष 2025-28 के कार्यकाल के लिए हुए चुनाव अब विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी रहे नंदू पटेल ने झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर चुनाव की वैधता को सीधी चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पूरी चुनावी प्रक्रिया न केवल JSCA के बायलॉज का उल्लंघन है, बल्कि यह नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के भी प्रतिकूल है।


107 वोटों पर सवाल, नियमों की अनदेखी का आरोप

नंदू पटेल की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि 18 मई को हुए चुनाव में कम से कम 107 ऐसे वोट डाले गए, जो नियमों के अनुसार अमान्य हैं। आरोप है कि:

  • कई सदस्यों ने मतदान किया जो लगातार 5 आम बैठकों से अनुपस्थित रहे थे।
  • कुछ सदस्य झारखंड राज्य के निवासी नहीं हैं।
  • कुछ ने न्यूनतम सदस्यता अवधि पूरी किए बिना ही वोट दिया।
  • लगभग आधा दर्जन सदस्यों ने एक से अधिक बार मतदान किया।

कानूनी प्रावधानों की अवहेलना

याचिका में JSCA की धारा 5(a)(iii) और धारा 2(d) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इन प्रावधानों की स्पष्ट अवहेलना की गई है। एक प्रमुख उदाहरण में बताया गया कि एक व्यक्ति को मात्र 16 वर्ष की उम्र में सदस्यता प्रदान कर दी गई, जबकि नियमानुसार न्यूनतम उम्र 18 वर्ष निर्धारित है।


नए चुनाव की मांग

नंदू पटेल ने अदालत से आग्रह किया है कि:

  • इस पूरे चुनाव को रद्द किया जाए।
  • नए सिरे से वैध मतदाता सूची तैयार की जाए।
  • सभी नियमों का पालन करते हुए पुनः निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं।

जीतने वालों में शहदेव गुट को क्लीन स्वीप

गौरतलब है कि 18 मई को हुए JSCA चुनाव में अजय नाथ शहदेव गुट ने क्लीन स्वीप किया था। इस चुनाव में:

  • अजय नाथ शहदेव – अध्यक्ष
  • संजय पांडेय – उपाध्यक्ष
  • सौरव तिवारी – सचिव
  • अमिताभ घोष – कोषाध्यक्ष
  • शाहबाज नदीम – संयुक्त सचिव
    और अन्य सभी पदों पर इसी गुट के प्रत्याशी विजयी रहे।

JSCA की सीमाओं पर भी उठे सवाल

याचिका में यह भी कहा गया है कि जब 15 अगस्त 2004 को बिहार क्रिकेट संघ (BCA) का नाम बदलकर JSCA रखा गया, तब स्पष्ट रूप से तय किया गया था कि संघ का कार्यक्षेत्र केवल झारखंड तक सीमित रहेगा। इसके बावजूद झारखंड से बाहर के करीब दो दर्जन लोगों को सदस्यता दी गई, जो नियमों के विरुद्ध है।


अब न्यायालय से उम्मीद

इस पूरे मामले में अब सभी की निगाहें झारखंड उच्च न्यायालय पर टिकी हैं। क्रिकेट प्रेमियों और राज्य के नागरिकों को उम्मीद है कि अदालत इस मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस निर्णय लेगी, ताकि राज्य में क्रिकेट प्रशासन की साख और विश्वसनीयता बनी रह सके।