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बहरागोड़ा में ‘आमादेर भाषा’ निःशुल्क बांग्ला शिक्षण केंद्र का शुभारंभ, महिलाओं की पहल ने रचा नया इतिहास

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बहरागोड़ा | संवाददाता (एन बेरा )

बहरागोड़ा में बुधवार शाम भाषा और संस्कृति संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। नेताजी सुभाष शिशु उद्यान के समीप वंदना मेडिकल के ऊपर दो तल्ला में ‘आमादेर भाषा’ निःशुल्क बांग्ला शिक्षण केंद्र का औपचारिक उद्घाटन किया गया। इस पहल की विशेष बात यह है कि इसे क्षेत्र की नौ महिलाओं ने मिलकर आगे बढ़ाया है, जिनका उद्देश्य अगली पीढ़ी को बांग्ला भाषा और संस्कृति से जोड़ना है।

मुख्य अतिथि ने किया उद्घाटन, कहा — भाषा का संरक्षण आत्मपहचान की सुरक्षा

कार्यक्रम का शुभारंभ महिला कल्याण समिति की सचिव और तारापद शारंगी डीएवी स्कूल की चेयरपर्सन डॉ. बिनी सारंगी तथा
नेताजी सुभाष शिशु उद्यान के संस्थापक और समाजसेवी रवींद्रनाथ दास ने संयुक्त रूप से फिता काटकर किया।

मुख्य अतिथि डॉ. बिनी सारंगी ने कहा,
“किसी भी भाषा का अस्तित्व समाज की जागरूकता पर निर्भर करता है। ‘आमादेर भाषा’ जैसी पहल आने वाली पीढ़ी को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगी।”

उन्होंने मातृभाषा संरक्षण को एक सांस्कृतिक दायित्व और आत्मपहचान की रक्षा बताया।

बांग्ला संस्कृति को फिर से जीवित करने का प्रयास: रवींद्रनाथ दास

विशिष्ट अतिथि रवींद्रनाथ दास ने अपने संबोधन में बहरागोड़ा की बांग्ला भाषा विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा—
“बांग्ला यहां की मिट्टी में घुली-मिली है। यह शिक्षण केंद्र इस धरोहर को फिर से जीवंत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

महिलाओं ने साझा किया सपना और संवेदना

‘आमादेर भाषा’ समूह की सदस्य शिल्पा और पापिया अधिकारी ने कहा,
“अक्सर महिलाएँ घर-परिवार में अपनी पहचान खो देती हैं। यह केंद्र हमारी भाषा और सांस्कृतिक पहचान को वापस पाने की कोशिश है।”

मौमिता ने सुंदर रवींद्रसंगीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिया,
जबकि श्रावणी, मधुमिता और सोनाली ने अपने विचार साझा किए।

शून्य से शुरुआत, भाषा को भविष्य देना ही लक्ष्य” — डॉ. बेबी साव

इस पहल की मुख्य प्रेरणास्रोत डॉ. बेबी साव ने भावुक होकर कहा,
“हमारे पास न फंड है, न संसाधन… बस एक सपना है कि आने वाली पीढ़ियाँ अपनी मातृभाषा को जानें। अगर दस साल बाद कोई बच्चा कहे कि उसने यहां से बांग्ला सीखकर कुछ पाया, वही हमारी सबसे बड़ी जीत होगी।”

उन्होंने बताया कि इस पहल को कई प्रबुद्ध जनों का समर्थन मिला है, जिनमें—
गौरीकुंज उन्नयन समिति (घाटशिला) के अध्यक्ष तापस चटर्जी,
बहरागोड़ा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बालकृष्ण बेहरा,
घाटशिला कॉलेज के बांग्ला विभाग के डॉ. संदीप चंद्र,
तथा अन्य कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने अपनी शुभकामनाएं भेजी हैं।

गणमान्यों की रही उपस्थिति

कार्यक्रम में
टिनी टोज पब्लिक स्कूल के संस्थापक बिनय दास,
देवरंजन सेनापति, तुषार कांति नायक, सुजल दत्त, अनंत प्रधान
सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे और सभी ने इस पहल को क्षेत्र की सांस्कृतिक उन्नति में मील का पत्थर बताया।