बहरागोड़ा | संवाददाता
बहरागोड़ा प्रखंड क्षेत्र में पशुपालन ऋण योजना को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गुहियापाल पंचायत के बांकदह गांव निवासी द्विजेन राउत ने आरोप लगाया है कि पशु ऋण दिलवाने के नाम पर दो व्यक्तियों ने मिलकर उनके साथ व्यवस्थित तरीके से धोखाधड़ी की। ग्रामीण का कहना है कि फॉर्म भरवाने से लेकर पशुओं की तस्वीरें लेने तक, पूरी प्रक्रिया को वैध दिखाया गया, लेकिन जब ऋण की राशि बैंक से निकाली गई, तो वह उन्हें नहीं दी गई और कथित रूप से आरोपियों ने राशि को आपस में बाँट लिया।
तीन महीने बाद भी नहीं मिला एक रुपया, एजेंटों पर आरोप
पीड़ित द्विजेन राउत ने बताया कि लगभग तीन महीने पहले
- गुड़ाबंधा प्रखंड के अंगारपड़ा के विजोलिया हिमांशु बेरा
- भेंडर के मनोहर सिंह
ने उनसे संपर्क साधा। दोनों ने आश्वासन दिया कि वे उन्हें पशु ऋण दिलवा देंगे।
ग्रामीण के घर जाकर
- दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करवाए गए
- घर के ही पशुओं की तस्वीरें खींची गईं
- और उन्हीं पशुओं को ऋण स्वीकृति के लिए दिखाया गया
लेकिन जब ऋण बैंक से रिलीज़ हुआ, तो पूरी रकम आरोपियों ने खुद रख ली, और पीड़ित को पैसे देने के नाम पर टालमटोल शुरू कर दिया। ग्रामीण का आरोप है कि लगातार पूछने पर भी कोई जवाब नहीं मिलता।
पीड़ित ने BDO के माध्यम से उपायुक्त को सौंपी शिकायत
मामला बढ़ने पर बुधवार को द्विजेन राउत बहरागोड़ा प्रखंड कार्यालय पहुंचे और प्रखंड विकास पदाधिकारी केशव भारती को उपायुक्त के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में उन्होंने पूरी धोखाधड़ी का क्रमवार विवरण दिया और इस बात पर जोर दिया कि राशि उनके नाम पर बैंक से उठाई गई, लेकिन उन्हें एक रुपये तक नहीं दिया गया।
राजनीतिक दल भी हुआ सक्रिय, CPI(M) नेताओं ने उठाया मुद्दा
यह मामला तब राजनीतिक रंग ले बैठा जब पीड़ित ग्रामीण द्विजेन राउत अपनी शिकायत लेकर बहरागोड़ा स्थित CPI(M) कार्यालय पहुंचे। वहाँ उन्होंने पूरी घटना की जानकारी पार्टी नेतृत्व को दी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए
- CPI(M) के राज्य सदस्य स्वपन कुमार महतो
- अंचल सचिव चित्त रंजन महतो
ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए पीड़ित को साथ लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंचकर बीडीओ को ज्ञापन सौंपा।
पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं में इस तरह की धोखाधड़ी गरीबों के अधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने मांग की कि मामले की त्वरित जांच हो और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों में आक्रोश, योजना की पारदर्शिता पर सवाल
घटना सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचे, इसके लिए प्रशासन को इस तरह की घटनाओं पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए।
लोगों का यह भी कहना है कि अगर जांच निष्पक्ष हुई तो और भी मामलों का खुलासा संभव है।