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भाजपा अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति पद को लेकर मंथन तेज, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्गों पर हो सकता है दांव

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अबुआ खबर ब्यूरो| नई दिल्ली |भाजपा संगठन और एनडीए गठबंधन में जल्द ही दो बड़े पदों को लेकर अहम फैसले लिए जा सकते हैं। एक ओर जहां भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर लंबे समय से चर्चा जारी है, वहीं दूसरी ओर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद इस पद को लेकर भी गंभीरता से विचार हो रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, दोनों पदों पर एक साथ निर्णय लिया जा सकता है, जिसकी औपचारिक प्रक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से लौटने के बाद शुरू होने की संभावना है।

भाजपा अध्यक्ष पद: ओबीसी चेहरे को मिल सकता है मौका

राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए सबसे उपयुक्त चेहरे की तलाश में पार्टी नेतृत्व जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहता है। माना जा रहा है कि इस बार ओबीसी वर्ग से आने वाले नेता को पार्टी की कमान सौंपी जा सकती है। भाजपा का प्रयास है कि वह सामाजिक संतुलन और आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए ऐसा चेहरा सामने लाए जो राजनीतिक संदेश भी दे सके और संगठनात्मक मजबूती भी सुनिश्चित कर सके।

उपराष्ट्रपति पद: अल्पसंख्यक या अगड़ी जाति पर हो सकता है फोकस

उपराष्ट्रपति पद के लिए पार्टी पूर्व या वर्तमान सांसद को उम्मीदवार बना सकती है। सूत्रों की मानें तो कोई केंद्रीय मंत्री या लोकसभा सदस्य इस दौड़ में नहीं है। भाजपा इस पद के लिए अल्पसंख्यक वर्ग या अगड़ी जाति से आने वाले व्यक्ति पर विचार कर सकती है, जिससे गठबंधन के भीतर संतुलन बना रहे और राष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक नैरेटिव स्थापित किया जा सके।

भाजपा-संघ नेतृत्व करेगा अंतिम निर्णय

इन दोनों अहम पदों पर अंतिम निर्णय भाजपा और संघ के शीर्ष नेतृत्व की बैठक में लिया जाएगा। दोनों की चयन प्रक्रिया भले ही अलग हो, लेकिन उम्मीदवारों के नामों की घोषणा एक साथ हो सकती है। ऐसा कर के भाजपा न केवल संगठनात्मक स्थिरता प्राप्त करना चाहती है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सामाजिक व राजनीतिक संतुलन का भी स्पष्ट संकेत देना चाहती है।

अगले पखवाड़े में हो सकता है ऐलान

सूत्रों का कहना है कि आने वाले एक से दो हफ्तों में इन दोनों पदों के लिए नामों की घोषणा संभव है। उपराष्ट्रपति पद के चुनाव की अधिसूचना अगले सप्ताह तक जारी हो सकती है। ऐसे में पार्टी और गठबंधन के अन्य घटक दलों की निगाहें अब भाजपा नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं।