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चाकुलिया: स्वर्णरेखा परियोजना की लापरवाही से जानलेवा बनी पुलिया, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

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चाकुलिया, पूर्वी सिंहभूम संवाददाता रोहन सिंह – चाकुलिया प्रखंड में हवाई पट्टी से मुराल को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर एक खतरनाक हालात पैदा हो चुके हैं। स्वर्णरेखा परियोजना की चांडिल मुख्य बांयी नहर पर बनी शाखा नहर की पुलिया की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि अब यह जानलेवा बन चुकी है। भारी बारिश के चलते संपर्क पथ का आधा हिस्सा कट गया है, जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है।

जान जोखिम में डालकर गुजर रहे ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार इस पुलिया से केवल साइकिल और बाइक जैसे छोटे वाहन ही बड़ी मुश्किल से गुजर पा रहे हैं। टेंपो और चारपहिया वाहन अब इस जर्जर पुलिया से नहीं गुजर सकते, क्योंकि कटाव ने सड़क को पूरी तरह असुरक्षित बना दिया है। रात के समय इस मार्ग से गुजरना किसी खतरे को न्यौता देने जैसा है, क्योंकि नहर काफी गहरी है और जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है।

स्कूल जाने वाले छात्र और ग्रामीण सबसे अधिक प्रभावित
पूर्णापानी, ज्वालभांगा, रांगामाटिया, टांगाशोली समेत कई गांवों को जोड़ने वाली यह सड़क मुराल के पास चाकुलिया – केरूकोचा मुख्य सड़क से मिलती है। रोज़ाना सैकड़ों ग्रामीण इसी रास्ते से बाइक और साइकिल पर आना-जाना करते हैं। स्कूली बच्चों को भी इसी मार्ग से होकर स्कूल जाना पड़ता है। सड़क बंद होने की स्थिति में इन गांवों का संपर्क पूरी तरह कट सकता है।

स्वर्णरेखा परियोजना के अधिकारियों की घोर लापरवाही
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह पुलिया वर्षों से खस्ताहाल स्थिति में है, लेकिन स्वर्णरेखा परियोजना के अधिकारियों की आंखें अब तक नहीं खुली हैं। पुलिया में जगह-जगह सरिए बाहर निकल आए हैं, जिससे यह और भी खतरनाक हो गई है। यदि समय रहते मरम्मत कार्य नहीं किया गया, तो यह मार्ग पूरी तरह ठप हो जाएगा और कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

जनहित में शीघ्र कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इस पुलिया की मरम्मत करवाई जाए और सड़क के कटाव को रोका जाए। यदि अधिकारियों ने अब भी ध्यान नहीं दिया, तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे। यह मामला अब केवल सड़कीय सुविधा का नहीं, बल्कि सैकड़ों लोगों की जान और सुरक्षा का बन चुका है।


जिम्मेदार कौन?
स्वर्णरेखा परियोजना के पदाधिकारियों की यह लापरवाही बर्दाश्त के काबिल नहीं। यह महज एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक असंवेदनशीलता का स्पष्ट उदाहरण है। क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?